Friday, July 3, 2020

देशभक्ती गीत


देशभक्ती गीत अनुक्रमणिका 1.मेरे देश की धरती 2. कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं 3.हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब 4.रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं 5.जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा 6.हर देश मे तू 7.ऐ प्यारी भारत माॕ 8.सारे जहाँ से अच्छा 9. हिंद देश के निवासी 10. ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा 11. नया दौर 12. भूलकर हम भेद सारे देश बंधू एक होगे|| 13.हिंद देश की विशेषता 14. ऐ मेरे वतन के लोगों 15.नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ 16.तेरी मिट्टी में 17.अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही १८. तिरंगा देशभक्ती गीत 19.मेरा मुल्क २०. सवारते चलो वतन २१. कँधो से मिलते है कंधे....... २२.शुर सैैनिकास देशभक्ति गीत २३.हिंद के बहादुरो... २४.आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की २५.चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है २६.एकता, स्वतंत्रता,समानता रहे २७. अनेकता मे एकता २८.ध्वज उंच तिरंगा डोले रे २९ उठो हिंद के वीर सपूतो 30.प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा ३१. गलत मत कदम उठाओ... ३२. ए वतन... ३३. ये मेरा वतन है... ३४.भारत हमको जान से प्यारा है| ३५.भारत हमको जान से प्यारा है ३६. ये मेरा वतन है ३७.नौ जवानो. ३८. वंदे मातरम् ३९.मनुष्य तू बडा महान है। ४०.सबसे ऊॅंची विजय पताका ४१.विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा ४२.दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल हिंदी देशभक्ती/समूह गीत 1.मेरे देश की धरती बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कमल मुस्काते हैं सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अँगड़ाइयाँ लेती है क्यों ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जन्म लिया उसने ही पाया प्यार तेरा यहाँ अपना पराया कोई नही हैं सब पे है माँ उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती ये बाग़ हैं गौतम नानक का खिलते हैं अमन के फूल यहाँ गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ रंग हरा हरिसिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगतसिंह से रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती *संकलक* श्रीमती सोनाली मधुकर साळुंखे शाळा-मामलदे तालुका-चोपडा जिल्हा-जळगाव 2. कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो ,दिल दुश्मन के हिलते हैं , अब तो हमें आगे बढते है रहना , अब तो हमें साथी, है बस इतना ही कहना, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना , अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो, दिल दुश्मन के हिलते हैं , निकले हैं मैदान पर, हम जान हथेली पर लेकर , अब देखो दम लेंगे हम, जाके अपनी मंजिल पर , खतरों से हंसके खेलना, इतनी तो हममे हिम्मत है , मोड़े कलाई मौत की , इतनी तो हममे ताक़त है , हम सरहदों के वास्ते, लोहे की इक दीवार हैं , हम दुशमन के वास्ते, होशीयार हैं तैयार हैं , अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना , अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो, जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो, जीत की तो तस्वीर बनाने , हम निकले हैं अपने लहू से, हम को उस में रंग भरना है, साथी मैंने अपने दिल में अब यह ठान लिया है , या तो अब करना है, या तो अब मरना है , चाहे अंगारें बरसे या बर्फ गिरे , तू अकेला नहीं होगा यारा मेरे , कोई मुश्किल हो या हो कोई मोर्चा, साथ हर हाल में होंगे साथी तेरे, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , इक चेहरा अक्षर मुझे याद आता है, इस दिल को चुपके चुपके वो तड़पाता है, जब घर से कोई भी ख़त आया है, कागज़ वो मैंने भीगा भीगा पाया है, पलकों पलकों पर यादों के कुछ दीप जैसे जलते हैं, कुछ सपने ऐसे हैं जो साथ साथ चलते हैं, कोई सपना न टूटे, कोई वादा न टूटे, तुम चाहो जिसे दिल से वो तुमसे न रूठे, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , चलता है जो यह कारवां , गूंजी सी है यह वादियाँ, है यह ज़मीन , यह आसमान, है यह हवा, है यह समां, हर रास्ते ने, हर वादी ने, हर परबत ने सदा दी, हम जीतेंगे, हम जीतेंगे , हम जीतेंगे हर बाज़ी, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना, कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं संकलक श्रीमती सोनाली मधुकर साळुंखे शाळा-मामलदे तालुका-चोपडा जिल्हा-जळगाव 3.हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन होगी शान्ति चारों होगी शान्ति चारों ओर होगी शान्ति चारों ओर एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास होगी शान्ति चारों ओर एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन हम चलेंगे साथ साथ डाले हाथों में हाथ हम चलेंगे साथ साथ एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम चलेंगे साथ साथ एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन नहीं डर किसी का आज नहीं भय किसी का आज नहीं डर किसी का आज के दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास नहीं डर किसी का आज के दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन गितकार-गिरिजाकुमार माथुर 4.रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी.. गीतकार- पंडित विनयचन्द्र मौद्गल्य [5/30, 8:13 AM] +91 94218 58326: 5.जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा वो भारत देश है मेरा ||१|| ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा वो भारत देश है मेरा ||२|| अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा वो भारत देश है मेरा ||३ || जब आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा वो भारत देश है मेरा ||४ || संकलन:- चित्रा गोतमारे. ता. नेर, जि. यवतमाळ. 6.हर देश मे तू हर देश में तू,हर भेष में तू , तेरे नाम अनेक तू एक ही है | तेरी रंगभूमि वह विश्व भरा, सब खेल खेल में तू ही तू है ||१ || सागर से उठा बादल बनके, बादल से फटा जल होकर के | फिर नहर बना, नदियां गहरी तेरे भिन्न प्रकार तू ही एक है ||२|| चिटीयों से अणु परमाणु बना, सब जीव जगत का रूप लिया, कहीं पर्वत वृक्ष विशाल बना, सौंदर्य तेरा तू एक ही है ||३|| यह दिव्य दिखाया है जिसने, वह है गुरुदेव की पूर्ण दया, तुकड्या कहे और न कोई दिखा, बस मै और तू, सब एक ही है ||३|| संकलन:- चित्रा गोतमारे. ता. नेर, जि. यवतमाळ. 7.ऐ प्यारी भारत माॕ ऐ प्यारी भारत माँ ‌तेरे हम गीत गाते हे| गुनगुनाते हे खुशी से गीत गाते है, ऐ प्यारी भारत माँ||धृ|| स्वर लहरों का गुंजन माॅं, झरझर झर के झरनों में हसी खुशी का नर्तन माॅं, थिरप थिरप किया मोरोंने||१|| जिना हमने सिखा माँ, छञपती शिवराजा से| मरना हमने सिखा माँ, शेर शंभू राजा से| जिना मरना तेरे कारण, शपथ उठाते है||२|| ‌ऐ प्यारी भारत माँ..... 8.सारे जहाँ से अच्छा सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी, वो गुलसितां हमारा गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा, सारे ... पर्वत हो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का वो संतरी हमारा, वो पासवां हमारा, सारे ... गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनां हमारा सारे ... ऐ आब-ए-रौंद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको उतरा तेरे किनारे, जब कारवां हमारा, सारे .. . मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा, सारे ... यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहाँ से अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा, सारे ... कुछ बात है की हस्ती, मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा, सारे .. . 'इक़बाल' कोई मरहूम, अपना नहीं जहाँ में मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा, सारे गीतकार इकबाल संकलक वैशाली सावंत कल्याण ठाणे 9. हिंद देश के निवासी हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी.. संकलक- हेमलता बाळासाहेब राजगुरू शाळा- अमरवाडी तालुका- जुन्नर जिल्हा- पुणे 10. ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन हैं हम सब का, लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने हैं प्राण गवाये कुछ याद उन्हें भी कर लो, कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये, जो लौट के घर ना आये ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय, ख़तरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लडे वो, फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा, सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मद्रासी सरहद पर मरनेवाला, हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वतपर, वो खून था हिन्दुस्तानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदुक उठाके दस दस को एक ने मारा, फिर गिर गये होश गँवा के जब अंत समय आया तो, कह गये के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिए कही ये कहानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जय हिंद, जय हिंद की सेना जय हिंद, जय हिंद की सेना jayshree netaji dhumal osmanabad 11. नया दौर यह देश है वीर जवानोका अलबेलो का,मस्तानो का इस देश का यारो क्या कहना यह देश है दुनिया का गाहना.......... यहा चौडी छाती वीरों की यहा भोली शकलें हीरो की यहां गाते है रांझे मस्ती मे मचती है धूमे बस्ती मे.......... पेडों पे बहारे झूलो की राहों मे कतारे फूलों की यहा हसता है सावन बालो में खिलती है कलियां गालो मे........... कही दंगल शोख जवानो के कही करतब तीर कमानो के यहां नित-नित मेले सजते है नित ढोल और ताशे बजते है...... दिलवर के लिए दिलदार है हम दुश्मन के लिए तलवार है हम मैदा मे अगर हम डाट जाआ मुश्किल है की पिछे हट जाएं........... संकलकi मीनाक्षी काटकर यवतमाळ 12. भूलकर हम भेद सारे देश बंधू एक होगे|| एकता के गीत गाकर राष्ट्र की रक्षा करेंगे| राष्ट्र पर संकटे गिरा तो सामना उसका करेंगे| याद कर इतिहास साक्षी सत्य के खातिर मरेंगे | हिंदाभू के पुत्र है हम ना किसी से हम डरेंगे | भूलकर हम भेद सारे ||1|| शांती का संदेश देता विश्व मे भारत हमारा | शूर वीरोंकी भूमीहै प्रेरणा जय हिंद हमारा | पूजा संतोकी धरा है है कर्म करते ही रहेंगे | भूलकर हम भेद सारेदेशबंधू एक होंगे ||2|| संकलन शुभांगी राहणे प.जि.बुलडाणा. स.खामगाव 13.हिंद देश की विशेषता अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता देश की विशेषता , राष्ट्र की विशेषता एक राह में है मित मित एक प्यारके एक बाग के हैं फुल फुल एक हारके देखती है यह जमीन आसमान देखता __ १ एक देश के अंग रंग भिन्न भिन्न है ‌‌ एक जननी भारती के कोटी सूत अभिन्न है कोटी जीव बालकोके ब्रह्म एक खेलता __ २ कर्म है बटे हुये पर एक भूल मर्म है राष्ट्रभक्ती ही हमारा एकमात्र धर्म है कंठ कंठ देश का एक स्वर बिखेरता __ ३ संकलन _ योगिता पंकज लोखंडे धरणगाव जि. जळगाव 14. ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये जो लौट के घर ना आये ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिए सुनो ये कहानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जब घायल हुआ हिमालय खतरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लड़े वो जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने थी धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी कोई सिख कोई जाट मराठा कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी कोई गुरखा कोई मदरासी सरहद पर मरनेवाला सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बन्दूक उठाके दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गये होश गँवा के जब अन्त-समय आया तो जब अन्त-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं अब हम तो सफ़र करते हैं क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी तुम भूल न जाओ उनको इस लिये कही ये कहानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की सेना जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की सेना जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द *संकलन* नूतन चौधरी मालेगाव, नाशिक 15.नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ बोलो मेरे संग, जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद ... रस्ते पे चलूंगा न डर-डर के चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के मंज़िल से पहले ना लूंगा कहीं दम आगे ही आगे बढ़ाउंगा कदम दाहिने बाएं दाहिने बाएं, थम! नन्हा ... धूप में पसीना बहाउंगा जहाँ हरे-भरे खेत लहराएंगे वहाँ धरती पे फ़ाके न पाएंगे जनम आगे ही आगे ... नया है ज़माना मेरी नई है डगर देश को बनाउंगा मशीनों का नगर भारत किसी से न रहेगा कम आगे ही आगे ... बड़ा हो के देश का सितारा बनूंगा दुनिया की आँखों का तारा बनूंगा रखूँगा ऊंचा तिरंगा हरदम आगे ही आगे ... शांति कि नगरी है मेरा ये वतन सबको सिखाऊंगा प्यार का चलन दुनिया में गिरने न दूंगा कहीं बम आगे ही आगे ... संकलक: *ज्योती परदेशी* *जि प शाळा देऊर खुर्द* *ता जि धुळे* 16.तेरी मिट्टी में... तलवारों पे सर वार दिये अंगारों में जिस्म जलाया है तब जा के कहीं हमने सर पे ये केसरी रंग सजाया है ऐ मेरी ज़मीं, अफ़सोस नही जो तेरे लिये सौ दर्द सहे महफ़ूज़ रहे तेरी आन सदा, चाहे जान मेरी ये रहे ना रहे ऐ मेरी ज़मीं, महबूब मेरी मेरी नस-नस में तेरा इश्क़ बहे "फिका ना पड़े कभी रंग तेरा, " जिस्मों से निकल के खून कहे तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरे खेतों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू सरसों से भरे खलिहान मेरे जहाँ झूम के भंगडा पा ना सका आबाद रहे वो गाँव मेरा जहाँ लौट के वापस जा ना सका ओ वतना वे , मेरे वतना वे तेरा-मेरा प्यार निराला था कुर्बान हुआ तेरी अस्मत पे मैं कितना नसीबो वाला था तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरे खेतों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू केसरी ओ हीर मेरी, तू हँसती रहे तेरी आँख घड़ी भर नम ना हो मैं मरता था जिस मुखड़े पे कभी उसका उजाला कम ना हो ओ माई मेरी, क्या फ़िक्र तुझे? क्यूँ आँख से दरिया बहता है? तू कहती थी, तेरा चाँद हूँ मैं और चाँद हमेशा रहता है तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरी फ़सलों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू संकलन : सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी. बु. ता. अर्धापूर. जि. नांदेड 17.अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... सर कटा सकते है लेकिन,सर झुका सकते नही हमने सदियो मे ये. आजादी की नेमत पायी है सैकडो कुर्बानीया देकर ये दौलत पाइ हे मुस्कुराकर खाये सीनो पे अपने गोलिया कितने विरानो से गुजरे है तो जन्नत पाइ है खाक मे अपनी ईज्जत को मिला सकते नही अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... क्या चलेगी जुल्म की.अहले वफा के सामने हा नही सकता कोई शोला हवाके सामने लाख फौजे ले के आए अमन का दुश्मन कोई रुक नही सकता हमारी एकता के सामने हम वो पत्थर है जिसे दुश्मन हिला सकता नही अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... वक्त की आवाज के साथ हम चलते जायेंगे प्रतिभा पाटील जळगाव १८. देशभक्ती गीत यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है अरमान तिरंगा है अभिमान तिरंगा है अरमान तिरंगा है अभिमान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है याद सहीदो की आएगी जब ये ध्वज लहराएंगे जब ये ध्वज लहराएंगे इसके तीनों रंग कयामत सदियों तक लहरायेंगे आजादी जिनके दम से है उनका नाम बढ़ायेंगे उनकी क़ुरबानी को यारो हरगिज़ नहीं लजायेंगे विश्वास तिरंगा है वरदान तिरंगा है विश्वास तिरंगा है वरदान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है इसके खातिर कसम है हमको अपना शीश कटा देंगे अपना शीश कटा देंगे जितना भी इस जिस्म में बाकी सारा लहू बहा देंगे सारा लहू बहा देंगे इसके खातिर जो हम थानेगे करके हम दिखला देंगे अपनी धरती के आगे हम सारा गगन झुका देंगे सारा गगन झुका देंगे ईमान तिरंगा है भगवान् तिरंगा है ईमान तिरंगा है भगवान् तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है. संकलक: *ज्योती परदेशी* जि प शाळा देऊर खुर्द ता जि धुळे १९.मेरा मुल्क..... मेरा मुल्क, मेरा देश, मेरा ये वतन शांति का, उन्नति का , प्यार का चमन इसके वास्ते निसार है , मेरा तन ss मेरा मन ए वतन ... 3 जानेमन...3 मेरा मुल्क...........का चमन इसकी मिट्टी से बने, तेरे मेरे ये बदन इसकी धरती, तेरे मेरे , वासते गगन इसने ही सिखाया हमको, जिने का चलन....3 इसके वासते निसार है मेरा तन, मेरा मन ए वतन .... 3 जाने मन...... 3 संकलन : सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी. बु. ता. अर्धापूर. जि. नांदेड. २०. सवारते चलो वतन सवारते चलो वतन दुलारते चलो वतन मुसीबते हजार है, रुके नही बडे चरण निखर रहा शवाब है यह वक्त लाजवाब है जिधर बडे कदम उधर जानो इन्कलाब है इन्कलाब जिंदाबाद (२) समाज के सडे गले विचार को करो दफन यह देश तो हसीन है विहस रही जमीन है मगर यहाँ का आदमी अभी नही जहीन है बिखरे दो विकास कि जमक धमक भरी किरण संकलन - श्रीम.इंगळे सुनिता भाऊसाहेब कोपरगाव जि.अ.नगर . २१. कँधो से मिलते है कंधे....... कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोह दिल दुश्मन के हिलते हैं कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं| अब तो हमें आगे बढ़ते है रेहना अब तो हमें साथी है बस इतना ही कहना अब तो हमें आगे बढ़ते हैं रहना अब तो हमें साथी है बस इतना ही कहना अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं| निकले हैं मैदान में हम जान हथेली पर ले कर अब देखो दम लेंगे हम जाके अपनी मंज़िल पर खतरों से हस्के खेलना इतनी तो हम में हिम्मत है मोड़े कलाई मौत की इतनी तो हम में ताक़त है हम सरहदों के वास्ते लोहे की एक दीवार है हम दुश्मनों के वास्ते होशियार है तैयार है अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं| जोश दिल में जगाते चलो जीत के गीत गाते चलो जीत की जो तस्वीर बनाने हम निकले हैं अपनी लहू से हम को उस में रंग भरना है साथी मैंने अपने दिल में अब ये ठान लिया है या तो अब करना है या तो अब मरना है चाहें अंगारें बरसे के बिजली गिरे तू अकेला नहीं होगा यारा मेरे कोई मुश्किल हो या हो कोई मोर्चा साथ हर मोड़ पर होंगे साथी तेरे अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोदिल दुश्मन के हिलते हैं | इक चेहरा अक्सर मुझे याद आता है इस दिल को चुपके चुपके वो तड़पाता है जब घरसे कोई भी खत आया है कागज़ को मैंने भीगा भीगा पाया है हो, पलकों पे यादों के कुछ दीप जैसे जलते हैं कुछ सपने ऐसे हैं जो साथ साथ चलते हैं कोई सपना न टूटे कोई वादा न टूटे तुम चाहो जिससे दिल से वो तुमसे ना रूठे अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके पर्बत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोह दिल दुश्मन के हिलते हैं| चलता है जो ये कारवाँ गुंजी सी है ये वादियां है ये ज़मीन (गुंजी गुंजी) ये आसमान (गूंजा गूंजा) है ये हवा (गुंजी गुंजी) है ये समां (गूंजा गूंजा) हर रस्ते ने हर वादी ने हर पर्बत ने सदा दी हम जीतेंगे हम जीतेंगे हम जीतेंगे हर बाज़ी कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं | संकलन :सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी बु. ता. अर्धापूर जि. नांदेड २२. २३.हिंद के बहादुरो... हिंद के बहादुरो, वक्त की पुकार है बढना है बढना है, आगे सबसे बढना है......ध्रु दिलो मे जलती आग है, हथेलीयोमें जान है हौसले बुलंद है, गगन छुने वाले है आंधिया चले या बिजलिया गिरे हनुमानकी छलांग लेके, तीर बनके चलना है.......१ भूल जावो प्रांत भाषा, रंग भेदभाव को एकता के नामसे, सजावो हिंद भूमीको तुटेंगे नही, फुटेंगे नही कारवां हमारा यह कदम, कदम बढाना है......२ हम है दूत शांतीके, विश्व को बताना है जंगखोर हम नही, अतीत भी गवाह है यह बुद्ध की धरा, यह गांधी की की धरा नीती, धर्म-कर्म योग आज हमें लाना है हिंद के बहादूरो........३ लाला.......ला...... संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला २४.आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||धृ|| उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है बाट-बाट में हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती हैं बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||1|| ये हैं अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे बोल रही है कण कण से क़ुर्बानी राजस्थान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||2|| देखो मुल्क मराठों का यह यहां शिवाजी डोला था मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था हर पर्वत पे आग जली थी हर पत्थर एक शोला था बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था शेर शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||3|| जलियाँवाला बाग ये देखो यहीं चली थी गोलियां ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियां एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियां मरनेवाले बोल रहे थे इंक़लाब की बोलियां यहां लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||4|| ये देखो बंगाल यहां का हर चप्पा हरियाला है यहां का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम||5|| संकलक--अंजु जोशी बीड २५.चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु || हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 || जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 || जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3 || संकलक---अंजु जोशी बीड २६.एकता, स्वतंत्रता,समानता रहे देश मे चरित्र कि महानता रहे ||धृ|| कंठ है करोडो गीत एक राष्ट्र का, रंग है अनेक चित्र एक राष्ट्र का, रूप है अनेक भाव एक राष्ट्र का, शब्द है अनेक अर्थ एक राष्ट्र का, चेतना,समग्रता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||१|| विकास मे विवेक स्वप्न एक राष्ट्र का, योजना अनेक ध्यान एक राष्ट्र का, कर्म है अनेक लक्ष्य एक राष्ट्र का, पंथ है अनेक धर्म,एक राष्ट्र का, सादगी,सहिष्णुता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||२|| जाती है अनेक रक्त एक राष्ट्र का, पंक्ती है अनेक लेख एक राष्ट्र का, काम है अनेक अंग एक राष्ट्र का, हिरन है अनेक सूर्य एक राष्ट्र का, जागरण,मनुष्यता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||३|| संकलन:- मिनाक्षी प्रल्हादराव भटकर जि.प.उच्च प्राथमिक शाळा पानवाडी तालुका -आर्वी जिल्हा-वर्धा २७. अनेकता मे एकता अनेकता मे एकता हिंद की विशेषता एक राग के हे गीत ,गीत एक प्यार के!!धृ!! एक बाग के है फुल, फुल एक हार के देखती है यह जमीन आसमान देखता!!१ एक देश के हे अंग रंग भिन्नभिन्न आहै एक जनी भारती के नोटीस उत्तर अभिन्न आहे कोटी जीव बालको मे ब्रह्म एक खेलता!!२!! कर्म हे बडे हुए पर एक मूल मर्म है राष्ट्रभक्ती ही हमारा एक मात्र धर्म आहे कोटी कंठ कंठ का एक स्वर बीखेरता!!३!! एक लक्ष्य एक प्राण, प्रण से हम जुटे हुए एक भारती की अर्चना मे हम लगे हुए कोटी कोटी साधकों का एक राष्ट्र देवता!!४!! संकलन सौ.प्रतिभा पगारे २८.ध्वज उंच तिरंगा डोले रे ध्वज उंच तिरंगा डोले रे, ध्वज डोले रे (२) तो रवी चंद्राशी बोले रे!!धृ!! कोणी लढता लढता पडले रे (२) कोणी फासावरती चढले रे (२) यश त्यांचे गगना भिडले, गगना भिडले (२) का डोळे करिता ओले रे !!१!! जन हृदया बंधन कसले रे(२) चैतन्य असे रस-रसले(२) हे श्रेय अलौकिक असले ,अलौकिक असले(२) लाभले शिवाच्या मोले रे!!२!! स्वातंत्र्य बंधुता ,समता शांतता, अहिंसा, ममता ह्यांच्या स्तव हिंदी जनता, हिंदी जनता(२) ध्वज भुजदंडावर डोले रे!!३!! संकलन सौ.प्रतिभा पगारे २९ उठो हिंद के वीर सपूतो उठो हिंद के वीर सपूतो माँ ने तुम्हें पुकारा है खलिस्तान क्यों मांग रहे हो, हिंदुस्थान तुम्हारा है काश्मीर क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है बोरोलँड क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है आवाज दो हम एक है!!धृ!! हिंदू, मुस्लिम, सिख ,ईसाई, सब है भाई भाई प्रेम पाश में बंधे रहे तो, होगी नही लडाई एकही मंदिर मस्जिद गिरीजा, अलग नही गुरुद्वारा !!१!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है हम पंजाबी, हम बंगाली, गुजराती, मद्रासी लेकिन सबसे पहले हम है, केवल भारत वासी यही हमारा मूलमंत्र है, यही हमारा नारा!!२!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है सोना- चांँदी जो कुछ मांगो, हम देते है हिरा-मोती जो कुछ मांगो, हम देते है खून का कतरा कतरा मांगो, हम देते है महेल ठिकाणा जो कुछ मांगो, हम देते है तनका टुकडा टुकडा मांगो, हम देते है करो फैसला आज तुम्हे क्या, माँ का है बटवारा!!३!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्तान तुम्हारा है संकलन सौ.प्रतिभा पगारे 30.प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा चाल - कांची रे कांची रे प्रीत मेरी सांची प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा चमके हा धृवाचा तारा बंधूंनो चमके हा ध्रुवाचा तारा!!धृ!! ऋषीमुनी ,वाणी जन्मते इथे गंगा ,गोदा ,कृष्णा वाहते इथे अति पवित्र पावन ही भूमी वाहती नद्यांच्या धारा!!१!! प्यारा रे प्यारारे देश मेरा प्यारा आर्य,द्रविड,रजपूत संस्कृती भारी ब्रिटिश युग संपता,वाजे तुतारी इंग्रज ही गेले फ्रेंच ही गेले वर्षवी ममता तुषारा!!२!! प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा स्वातंत्र्याचा झेंडा मिरविला जगी स्वातंत्र्याचे बाहुबल आहे अंगी ना साथ डुलक्या पडक्या घराची लावू भवानी अंगारा हो!!३!! प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा संकलन सौ.प्रतिभा पगारे ए मेरे वतन के लोगो ए मेरे वतन के लोगो तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा दो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिये सुनो ये कहानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय खतरे मे पडी आजादी जब तक थी साँस लढे वो फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जब देश मे थी दिवाली वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने की धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बंदूक उठाके दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के जब अंत-समय आया तो कह गये के अब मरते है खुश रहना देश के प्यारो अब हम तो सफर करते है क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी तुम भूल न जाओ उनको इसलिये कही ये कहानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जय हिंद जय हिंद जय हिंद की सेना जय हिंद जय हिंद जय हिंद की सेना जय हिंद जय हिंद जय हिंद संकलक सौ.श्वेता राजेंद्र घरत ३१. गलत मत कदम उठाओ... गलत मत कदम उठाओ सोचकर चलो, विचार कर चलो राह की मुसीबतोंसे प्यार कर चलो.....ध्रु प्रणाम कर तिरंगे को, है हिंद का निशान मर मिटेंगे हम सभी, रखेंगे इसकी शान भाईयों चलो, बहनो तुम चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......१ वक्त की आवाज है, ये भुलना नही स्वतंत्रता की रक्षा करने, हटना नही शीष ले चलो, जान ले चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ........२ वीर शिवाजी, राणा के, भूमी में हम पले आझाद हिंद सेनाको, हम नही भूले नेफापे चलो, लद्दाख को चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......३ हिन्दु, बौद्ध, सिख, जैन, ख्रिस्ती पारसी एकता के ताजसे, सजी है भारती शिश झुकालो, तिलक लगालो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......४ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३२. ए वतन... ए वतन, ए वतन, जॉसे प्यारे वतन कर दु तुझेपे फिदा, अपना तन और मन.....ध्रु ए महकती हुयी, ठंडी ठंडी हवा झूम झूम उठे दिल, ऐसी रंगी फिजा तू तो है प्यार का मुस्कुराता चमन ए वतन, ए वतन.......१ तुझमें गांधी भी है, तुझमे नेहरू भी है तुझमें टिपू भी है, तुझमें आझाद भी तुने पैदा किये कैसे कैसे रतन ए वतन, ए वतन........२ गंगा जमुना तेरी, जैसी दो बेटीया जिनके दमसे हरी, होती है खेतीया सोना उगले जमी, लहराये चमन ए वतन, ए वतन.........३ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३३. ये मेरा वतन है... महका हुवा फुलोंसे, सदा मेरा चमन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है.......ध्रु बिखरे हुए हर मोडपे, दिलकश है नजारे भारतमें मेरे लोग तो, अनमोल है सारे मस्जिद भी है मंदिर भी, यहा गंगा चमन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है........१ रहते है यहा मिलकर, हर धरम के इन्सान सीनोमें धडकते है, यहा प्यार के अरमां सोने की धरती तो, सितारों का गगन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है........२ नफरत ना शिकायत ना, अदावत हो दिलोंमें बस प्यार हो अहसास, मोहब्बत हो दिलोंमें ये ऑख का तारा तो, अनमोल रतन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है.........३ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३४.भारत हमको जान से प्यारा है| भरत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ता हमारा है सदियों से भारत भूमी दुनिया की शान है भारतमाँकी रक्षा मे जीवन कुर्बान है| उजडे नही अपना चमन तुटे नही अपना वतन बुरीे राहना करदेे कोई मंदिर यहाँ मज्जीद यहां हिंदू यहा मुस्लीम यहा मिलते रहै हमसे प्यार हम प्यारसे हिन्दुस्तानी नाम हमारा सबसे प्यारा देश हमारा है जन्मभूमी है हमारी शान से कहेगे हम सभी को भाई भाई प्यार से कहेंगेहम आसामसे गुजरातक बंगाल से महाराष्ट्र तक जागी कही धून एक है भाषा कईसुर एक है काश्मीर से मद्रास तक कह दो सभी हम एक है| पि.के. मिश्रा संकलन -श्रीम.आशा भामरे जिल्हा परिषद शाळा शिलापूर नाशिक ३५.भारत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है भारत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है सदियों से भारत भूमी दुनियाँ की शान है भारत माँ की रक्षा में जीवन कुर्बान है भारत हमको जान से प्यारा हैं सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा हैं उजड़े नहीं अपना चमन टूटे नहीं अपना वतन गुमराह ना कर दे कोई बर्बाद ना कर दे कोई मंदिर यहाँ, मस्जिद यहाँ हिंदू यहाँ, मुस्लिम यहाँ मिलते रहे हम प्यार से जागो…… हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है जन्मभूमी हैं हमारी शान से कहेंगे हम सब ही तो भाई भाई प्यार से रहेंगे हम हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है आसाम से गुजरात तक बंगाल से महाराष्ट्र तक जाती कई -धुन एक हैं, भाषा कई -सूर एक है कश्मीर से मद्रास तक कह दो सभी हम एक है आवाज़ दो हम एक है जागो….. संकलन श्रीमती नूतन चौधरी जि.प.शाळा टेहेरे मालेगाव,नाशिक ३६. ये मेरा वतन है... मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुनके रहट की आवाज़ें यूं लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है क्यूं ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जनम लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा यहां अपना पराया कोई नहीं है सब पे है मां उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहां गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, ऐसे हैं अमन के फूल यहां रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… संकलन श्रीमती नूतन चौधरी मालेगाव,नाशिक ३७.नौ जवानो. नौ जवानो भारत की तकदीर बना दो फुलों को इस गुलशन से काटो को हटा दो ||धृ|| छोड के सारे भेदभाव को समझो देश हो अपना -२ रहना जाये देख अधुरा कोई सुंदर सपना-२ घर मे आग लगाये जो ,उस दीप को बुझा दो ||१|| हम भारत के वाशी क्यू हो दुनिया मे शरर्मिंदा-२ देश के कारण मौत भी है फिर भी रहेंगे जिंदा-२ जय जय हिंद के नारो से धरती को हिला दो ||२|| अपने साथ है कैसी कैसी बलवानों की शक्ती-२ वीर जवाहरलाल की हिंमत बापुजी की भक्ति-२ देश का झेंडा उॅंचा करके दिखा दो ||३|| संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ३८. वंदे मातरम् वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, भारत वंदे मातरम, जय भारत वंदे मातरम,रुकना पाहे तुफानो मे सबसे आगे बडे कदम जीवनपुष्प चढाने निकले माता के चरणों में हम ||धृ|| मस्तपर हिमराज विरहित, उन्नत माथा माता का चरणधोर हा विशाल सागर देश ही सुंदरता का हरियाली साडी पहनी मॉऽऽऽ हरियाली साडी पहनी मॉ गीत तुमहारे गाये हम ||१|| नदियन की पावन धारा है,मंगळ मला गंगा की कमरबंद है विद्याद्रिकी, सातपुडा की सेनीकी सह्याद्री का वज्रहस्त है ।ऽऽऽसह्याद्री का वज्रहस्त है । पौरुष को पहचाने हम ||२|| नही किसीके सामने अपने, अपना शीष झुकाया है। जो हमसे टकरायेगा,काल उसी का आया है। तेरा वैभव वैभव सदा रहे माॅ ऽऽऽतेरा वैभव वैभव सदा रहे माॅ विजय दर्ज पहराये हम ||३|| वंदे मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम्................. संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ३९.मनुष्य तू बडा महान है। धरती की शान तू है। मनु की संतान तेरे मुठ्ठीओमे बंद तुफान है रे । मनुष्य तू बडा महान है भूलो मत।मनुष्य तू बडा महान है।। तुजो चाहे पर्वत पहाड को फोड दे। तुजो चाहे नदी ओके मुख को भी मोड़ दे। तुजो चाहे माटी से अमृत भी छोड़ दे। तुजो चाहे धरती को अंबर से जोड दे। अमर तेरा प्राण ऽऽऽ-२मिला तुझको वरदान तेरी -आत्मा ओमे स्वंयभगवान है रे ||१|| नयनो ज्वाला तेरी गती में भू चाल है। तेरी छाती मे छुपा महाकाल है। पृथ्वी के लाल तेरी हिमगिरसा भाल । तेरी भुकू रोते तांडव का ताल है। निजको तु जान ऽऽऽ-२ जरा शक्ती पहचान रे तेरी बाहोमें थुम का आव्हान है रे ||२|| धरती सा धीर तुहे,अग्नीसा वीर तुहे। तुजो चाहे काल कोभी थाब ले। पपायो प्रलय रुके, पशुताका शिश झुके तुजो अगर हिंमत से काम ले। गुरूसा गतिमान ऽऽऽ-२ पवनसा तु साम गतिमान तेरी नभसे भी ऊंची उड्डान है रे ||३|| संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ४०.सबसे ऊॅंची विजय पताका सबसे उॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा मानवता का मानबिंदू यह भारत सबसे बड़ा रहेगा ।।धृ।। विंध्या की चट्टानों पर रेवा की यह गति तूफानी शत-शत वर्षा तक गाएगी जीवन की संघर्ष कहानी । इसके चरणों में नत होकर हिंदू महादधि पड़ा रहेगा सबसे उॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा।।1।। जिसकी मिट्टी में पारस है स्वर्ण -धूली उस बंगभूमि की पंचनदी के फव्वारों से सिंची बहारे पुण्य भूमि की। शीर्ष -बिंदु श्रीनगर सिंधु तक सेतुबंध भी अड़ा रहेगा सबसे ऊॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा ।।2।। जिस धरती पर चंदा सूरज साॅंझ सवेरे नमन चढ़ाते षड्-ऋतु के सरगम पर पंछी दीपक और मल्हार सुनाते । वही देश मणि माॅं वसुधा के हृदय हार में जड़ा रहेगा सबसे ऊॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा ।।3।। संकलन -मनिषा खामकर पुणे ४१.विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा झण्डा ऊँचा रहे हमारा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा ।।धृ।। सदा शक्ति बरसानेवाला प्रेम सुधा सरसानेवाला वीरों को हर्षानेवाला मातृभूमि का तन-मन सारा झण्डा ऊँचा ...।।१।। स्वतंत्रता के भीषण रण में लखकर कर जोश बढ़े क्षण-क्षण में काँपे शत्रु देख कर मन में मिट जावे भय संकट सारा झण्डा ऊँचा ...।।२।। इस झण्डे के नीचे निर्भय हो स्वराज जनता का निश्चय बोलो भारत माता की जय स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा झण्डा ऊँचा ...।।३।। शान न इस की जाने पावे चाहे जान भले ही जावे विश्व विजय कर के दिखलावे तब होवे प्रण पूर्ण हमारा झण्डा ऊँचा ...।।४।। रेखा शिंदे औरंगाबाद जि.प.प्रा.शाळा पाथ्री ४२.दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ...।।१।। धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई वाह रे फ़कीर खूब करामात दिखाई चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ..... रघुपति राघव राजा राम।।२।। शतरंज बिछा कर यहाँ बैठा था ज़माना लगता था मुश्किल है फ़िरंगी को हराना टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था ताना पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना मारा वो कस के दांव के उलटी सभी की चाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ..... रघुपति राघव राजा राम।।३।। जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े मज़दूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े हिंदू और मुसलमान, सिख पठान चल पड़े कदमों में तेरी कोटि कोटि प्राण चल पड़े फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी .... रघुपति राघव राजा राम।।४।। रघुपति राघव राजा राम मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोटी वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी दुनिया में भी बापू तू था इन्सान बेमिसाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ... रघुपति राघव राजा राम ।।५।। जग में जिया है कोई तो बापू तू ही जिया तूने वतन की राह में सब कुछ लुटा दिया माँगा न कोई तख्त न कोई ताज भी लिया अमृत दिया तो ठीक मगर खुद ज़हर पिया जिस दिन तेरी चिता जली, रोया था महाकाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल रघुपति राघव राजा राम।।६।। रेखा शिंदे औरंगाबाद जि.प.प्रा.शाळा पाथ्री समूह गीत हिंदी 1.इन्साफ की डगर पे बच्चे दिखाओ चलके यह देश है तुम्हारा नेता तुम्ही हो कल के दुनिया के रंज सहना और कुछ ना मुहसे कहना सच्चाई के बल पे आगे बढते रहना रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के इन्साफ की डगर पे //1// अपने हो या पराये सबके लिये हो न्याय देखो कदम तुम्हारा हरगीज डगमग आये रस्ते बडे कठीण आहे चलना संभल संभालके इंसाफ की डगर पे //2// इन्सानियत के सर पे इज्जत का ताज रखना तनमन की भेट देकर भारत की लाज रखना जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता जलके इंसाफ की डगर पे//3// संकलन सौ.अलका अनिल बामणे कन्या विद्या मंदिर उत्तूर ता.आजरा जि.कोल्हापूर समूह गीत. शिर्षक - दिल मेरा जान मेरी मेरा वतन.. 2. समूहगीत एक जगत की धरती माता, सब उसकी संतान ||धृ || भेदभावसे हम मुख मोडे | दुष्कर्मो का मार्ग छोडे | सब राष्ट्रो से नाता जोडे, बने गुणों की खान ||1|| सत्य, अहिंसा, प्रेम बढाये | देशभक्ती का दिप जलाए | जनसेवा को धर्म बनाए, रहे इसिमें ध्यान ||2|| दुर्जन को भी कर दे सज्जन | मानवतामय हो यह जीवन | सदा निती पर वाहे तनमन, बढे हमारी शान ||3|| संकलन : सौ. वागरे. जे. सी. जि. प. हा. लोणी ता. अर्धापूर जि. नांदेड

देशभक्ती गीत


हिंदी देशभक्ती/समूह गीत 1.मेरे देश की धरती बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कमल मुस्काते हैं सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अँगड़ाइयाँ लेती है क्यों ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जन्म लिया उसने ही पाया प्यार तेरा यहाँ अपना पराया कोई नही हैं सब पे है माँ उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती ये बाग़ हैं गौतम नानक का खिलते हैं अमन के फूल यहाँ गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ रंग हरा हरिसिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगतसिंह से रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती *संकलक* श्रीमती सोनाली मधुकर साळुंखे शाळा-मामलदे तालुका-चोपडा जिल्हा-जळगाव 2. कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो ,दिल दुश्मन के हिलते हैं , अब तो हमें आगे बढते है रहना , अब तो हमें साथी, है बस इतना ही कहना, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना , अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो, दिल दुश्मन के हिलते हैं , निकले हैं मैदान पर, हम जान हथेली पर लेकर , अब देखो दम लेंगे हम, जाके अपनी मंजिल पर , खतरों से हंसके खेलना, इतनी तो हममे हिम्मत है , मोड़े कलाई मौत की , इतनी तो हममे ताक़त है , हम सरहदों के वास्ते, लोहे की इक दीवार हैं , हम दुशमन के वास्ते, होशीयार हैं तैयार हैं , अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना , अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो, जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो, जीत की तो तस्वीर बनाने , हम निकले हैं अपने लहू से, हम को उस में रंग भरना है, साथी मैंने अपने दिल में अब यह ठान लिया है , या तो अब करना है, या तो अब मरना है , चाहे अंगारें बरसे या बर्फ गिरे , तू अकेला नहीं होगा यारा मेरे , कोई मुश्किल हो या हो कोई मोर्चा, साथ हर हाल में होंगे साथी तेरे, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , इक चेहरा अक्षर मुझे याद आता है, इस दिल को चुपके चुपके वो तड़पाता है, जब घर से कोई भी ख़त आया है, कागज़ वो मैंने भीगा भीगा पाया है, पलकों पलकों पर यादों के कुछ दीप जैसे जलते हैं, कुछ सपने ऐसे हैं जो साथ साथ चलते हैं, कोई सपना न टूटे, कोई वादा न टूटे, तुम चाहो जिसे दिल से वो तुमसे न रूठे, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , चलता है जो यह कारवां , गूंजी सी है यह वादियाँ, है यह ज़मीन , यह आसमान, है यह हवा, है यह समां, हर रास्ते ने, हर वादी ने, हर परबत ने सदा दी, हम जीतेंगे, हम जीतेंगे , हम जीतेंगे हर बाज़ी, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना, कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं संकलक श्रीमती सोनाली मधुकर साळुंखे शाळा-मामलदे तालुका-चोपडा जिल्हा-जळगाव 3.हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन होगी शान्ति चारों होगी शान्ति चारों ओर होगी शान्ति चारों ओर एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास होगी शान्ति चारों ओर एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन हम चलेंगे साथ साथ डाले हाथों में हाथ हम चलेंगे साथ साथ एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम चलेंगे साथ साथ एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन नहीं डर किसी का आज नहीं भय किसी का आज नहीं डर किसी का आज के दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास नहीं डर किसी का आज के दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन गितकार-गिरिजाकुमार माथुर 4.रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी.. गीतकार- पंडित विनयचन्द्र मौद्गल्य [5/30, 8:13 AM] +91 94218 58326: 5.जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा वो भारत देश है मेरा ||१|| ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा वो भारत देश है मेरा ||२|| अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा वो भारत देश है मेरा ||३ || जब आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा वो भारत देश है मेरा ||४ || संकलन:- चित्रा गोतमारे. ता. नेर, जि. यवतमाळ. 6.हर देश मे तू हर देश में तू,हर भेष में तू , तेरे नाम अनेक तू एक ही है | तेरी रंगभूमि वह विश्व भरा, सब खेल खेल में तू ही तू है ||१ || सागर से उठा बादल बनके, बादल से फटा जल होकर के | फिर नहर बना, नदियां गहरी तेरे भिन्न प्रकार तू ही एक है ||२|| चिटीयों से अणु परमाणु बना, सब जीव जगत का रूप लिया, कहीं पर्वत वृक्ष विशाल बना, सौंदर्य तेरा तू एक ही है ||३|| यह दिव्य दिखाया है जिसने, वह है गुरुदेव की पूर्ण दया, तुकड्या कहे और न कोई दिखा, बस मै और तू, सब एक ही है ||३|| संकलन:- चित्रा गोतमारे. ता. नेर, जि. यवतमाळ. 7.ऐ प्यारी भारत माॕ ऐ प्यारी भारत माँ ‌तेरे हम गीत गाते हे| गुनगुनाते हे खुशी से गीत गाते है, ऐ प्यारी भारत माँ||धृ|| स्वर लहरों का गुंजन माॅं, झरझर झर के झरनों में हसी खुशी का नर्तन माॅं, थिरप थिरप किया मोरोंने||१|| जिना हमने सिखा माँ, छञपती शिवराजा से| मरना हमने सिखा माँ, शेर शंभू राजा से| जिना मरना तेरे कारण, शपथ उठाते है||२|| ‌ऐ प्यारी भारत माँ..... 8.सारे जहाँ से अच्छा सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी, वो गुलसितां हमारा गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा, सारे ... पर्वत हो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का वो संतरी हमारा, वो पासवां हमारा, सारे ... गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनां हमारा सारे ... ऐ आब-ए-रौंद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको उतरा तेरे किनारे, जब कारवां हमारा, सारे .. . मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा, सारे ... यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहाँ से अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा, सारे ... कुछ बात है की हस्ती, मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा, सारे .. . 'इक़बाल' कोई मरहूम, अपना नहीं जहाँ में मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा, सारे गीतकार इकबाल संकलक वैशाली सावंत कल्याण ठाणे 9. हिंद देश के निवासी हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी.. संकलक- हेमलता बाळासाहेब राजगुरू शाळा- अमरवाडी तालुका- जुन्नर जिल्हा- पुणे 10. ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन हैं हम सब का, लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने हैं प्राण गवाये कुछ याद उन्हें भी कर लो, कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये, जो लौट के घर ना आये ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय, ख़तरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लडे वो, फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा, सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मद्रासी सरहद पर मरनेवाला, हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वतपर, वो खून था हिन्दुस्तानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदुक उठाके दस दस को एक ने मारा, फिर गिर गये होश गँवा के जब अंत समय आया तो, कह गये के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिए कही ये कहानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जय हिंद, जय हिंद की सेना जय हिंद, जय हिंद की सेना jayshree netaji dhumal osmanabad 11. नया दौर यह देश है वीर जवानोका अलबेलो का,मस्तानो का इस देश का यारो क्या कहना यह देश है दुनिया का गाहना.......... यहा चौडी छाती वीरों की यहा भोली शकलें हीरो की यहां गाते है रांझे मस्ती मे मचती है धूमे बस्ती मे.......... पेडों पे बहारे झूलो की राहों मे कतारे फूलों की यहा हसता है सावन बालो में खिलती है कलियां गालो मे........... कही दंगल शोख जवानो के कही करतब तीर कमानो के यहां नित-नित मेले सजते है नित ढोल और ताशे बजते है...... दिलवर के लिए दिलदार है हम दुश्मन के लिए तलवार है हम मैदा मे अगर हम डाट जाआ मुश्किल है की पिछे हट जाएं........... संकलकi मीनाक्षी काटकर यवतमाळ 12. भूलकर हम भेद सारे देश बंधू एक होगे|| एकता के गीत गाकर राष्ट्र की रक्षा करेंगे| राष्ट्र पर संकटे गिरा तो सामना उसका करेंगे| याद कर इतिहास साक्षी सत्य के खातिर मरेंगे | हिंदाभू के पुत्र है हम ना किसी से हम डरेंगे | भूलकर हम भेद सारे ||1|| शांती का संदेश देता विश्व मे भारत हमारा | शूर वीरोंकी भूमीहै प्रेरणा जय हिंद हमारा | पूजा संतोकी धरा है है कर्म करते ही रहेंगे | भूलकर हम भेद सारेदेशबंधू एक होंगे ||2|| संकलन शुभांगी राहणे प.जि.बुलडाणा. स.खामगाव 13.हिंद देश की विशेषता अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता देश की विशेषता , राष्ट्र की विशेषता एक राह में है मित मित एक प्यारके एक बाग के हैं फुल फुल एक हारके देखती है यह जमीन आसमान देखता __ १ एक देश के अंग रंग भिन्न भिन्न है ‌‌ एक जननी भारती के कोटी सूत अभिन्न है कोटी जीव बालकोके ब्रह्म एक खेलता __ २ कर्म है बटे हुये पर एक भूल मर्म है राष्ट्रभक्ती ही हमारा एकमात्र धर्म है कंठ कंठ देश का एक स्वर बिखेरता __ ३ संकलन _ योगिता पंकज लोखंडे धरणगाव जि. जळगाव 14. ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये जो लौट के घर ना आये ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिए सुनो ये कहानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जब घायल हुआ हिमालय खतरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लड़े वो जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने थी धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी कोई सिख कोई जाट मराठा कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी कोई गुरखा कोई मदरासी सरहद पर मरनेवाला सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बन्दूक उठाके दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गये होश गँवा के जब अन्त-समय आया तो जब अन्त-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं अब हम तो सफ़र करते हैं क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी तुम भूल न जाओ उनको इस लिये कही ये कहानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की सेना जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की सेना जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द *संकलन* नूतन चौधरी मालेगाव, नाशिक 15.नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ बोलो मेरे संग, जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद ... रस्ते पे चलूंगा न डर-डर के चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के मंज़िल से पहले ना लूंगा कहीं दम आगे ही आगे बढ़ाउंगा कदम दाहिने बाएं दाहिने बाएं, थम! नन्हा ... धूप में पसीना बहाउंगा जहाँ हरे-भरे खेत लहराएंगे वहाँ धरती पे फ़ाके न पाएंगे जनम आगे ही आगे ... नया है ज़माना मेरी नई है डगर देश को बनाउंगा मशीनों का नगर भारत किसी से न रहेगा कम आगे ही आगे ... बड़ा हो के देश का सितारा बनूंगा दुनिया की आँखों का तारा बनूंगा रखूँगा ऊंचा तिरंगा हरदम आगे ही आगे ... शांति कि नगरी है मेरा ये वतन सबको सिखाऊंगा प्यार का चलन दुनिया में गिरने न दूंगा कहीं बम आगे ही आगे ... संकलक: *ज्योती परदेशी* *जि प शाळा देऊर खुर्द* *ता जि धुळे* 16.तेरी मिट्टी में... तलवारों पे सर वार दिये अंगारों में जिस्म जलाया है तब जा के कहीं हमने सर पे ये केसरी रंग सजाया है ऐ मेरी ज़मीं, अफ़सोस नही जो तेरे लिये सौ दर्द सहे महफ़ूज़ रहे तेरी आन सदा, चाहे जान मेरी ये रहे ना रहे ऐ मेरी ज़मीं, महबूब मेरी मेरी नस-नस में तेरा इश्क़ बहे "फिका ना पड़े कभी रंग तेरा, " जिस्मों से निकल के खून कहे तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरे खेतों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू सरसों से भरे खलिहान मेरे जहाँ झूम के भंगडा पा ना सका आबाद रहे वो गाँव मेरा जहाँ लौट के वापस जा ना सका ओ वतना वे , मेरे वतना वे तेरा-मेरा प्यार निराला था कुर्बान हुआ तेरी अस्मत पे मैं कितना नसीबो वाला था तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरे खेतों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू केसरी ओ हीर मेरी, तू हँसती रहे तेरी आँख घड़ी भर नम ना हो मैं मरता था जिस मुखड़े पे कभी उसका उजाला कम ना हो ओ माई मेरी, क्या फ़िक्र तुझे? क्यूँ आँख से दरिया बहता है? तू कहती थी, तेरा चाँद हूँ मैं और चाँद हमेशा रहता है तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरी फ़सलों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू संकलन : सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी. बु. ता. अर्धापूर. जि. नांदेड 17.अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... सर कटा सकते है लेकिन,सर झुका सकते नही हमने सदियो मे ये. आजादी की नेमत पायी है सैकडो कुर्बानीया देकर ये दौलत पाइ हे मुस्कुराकर खाये सीनो पे अपने गोलिया कितने विरानो से गुजरे है तो जन्नत पाइ है खाक मे अपनी ईज्जत को मिला सकते नही अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... क्या चलेगी जुल्म की.अहले वफा के सामने हा नही सकता कोई शोला हवाके सामने लाख फौजे ले के आए अमन का दुश्मन कोई रुक नही सकता हमारी एकता के सामने हम वो पत्थर है जिसे दुश्मन हिला सकता नही अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... वक्त की आवाज के साथ हम चलते जायेंगे प्रतिभा पाटील जळगाव १८. देशभक्ती गीत यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है अरमान तिरंगा है अभिमान तिरंगा है अरमान तिरंगा है अभिमान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है याद सहीदो की आएगी जब ये ध्वज लहराएंगे जब ये ध्वज लहराएंगे इसके तीनों रंग कयामत सदियों तक लहरायेंगे आजादी जिनके दम से है उनका नाम बढ़ायेंगे उनकी क़ुरबानी को यारो हरगिज़ नहीं लजायेंगे विश्वास तिरंगा है वरदान तिरंगा है विश्वास तिरंगा है वरदान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है इसके खातिर कसम है हमको अपना शीश कटा देंगे अपना शीश कटा देंगे जितना भी इस जिस्म में बाकी सारा लहू बहा देंगे सारा लहू बहा देंगे इसके खातिर जो हम थानेगे करके हम दिखला देंगे अपनी धरती के आगे हम सारा गगन झुका देंगे सारा गगन झुका देंगे ईमान तिरंगा है भगवान् तिरंगा है ईमान तिरंगा है भगवान् तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है. संकलक: *ज्योती परदेशी* जि प शाळा देऊर खुर्द ता जि धुळे १९.मेरा मुल्क..... मेरा मुल्क, मेरा देश, मेरा ये वतन शांति का, उन्नति का , प्यार का चमन इसके वास्ते निसार है , मेरा तन ss मेरा मन ए वतन ... 3 जानेमन...3 मेरा मुल्क...........का चमन इसकी मिट्टी से बने, तेरे मेरे ये बदन इसकी धरती, तेरे मेरे , वासते गगन इसने ही सिखाया हमको, जिने का चलन....3 इसके वासते निसार है मेरा तन, मेरा मन ए वतन .... 3 जाने मन...... 3 संकलन : सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी. बु. ता. अर्धापूर. जि. नांदेड. २०. सवारते चलो वतन सवारते चलो वतन दुलारते चलो वतन मुसीबते हजार है, रुके नही बडे चरण निखर रहा शवाब है यह वक्त लाजवाब है जिधर बडे कदम उधर जानो इन्कलाब है इन्कलाब जिंदाबाद (२) समाज के सडे गले विचार को करो दफन यह देश तो हसीन है विहस रही जमीन है मगर यहाँ का आदमी अभी नही जहीन है बिखरे दो विकास कि जमक धमक भरी किरण संकलन - श्रीम.इंगळे सुनिता भाऊसाहेब कोपरगाव जि.अ.नगर . २१. कँधो से मिलते है कंधे....... कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोह दिल दुश्मन के हिलते हैं कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं| अब तो हमें आगे बढ़ते है रेहना अब तो हमें साथी है बस इतना ही कहना अब तो हमें आगे बढ़ते हैं रहना अब तो हमें साथी है बस इतना ही कहना अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं| निकले हैं मैदान में हम जान हथेली पर ले कर अब देखो दम लेंगे हम जाके अपनी मंज़िल पर खतरों से हस्के खेलना इतनी तो हम में हिम्मत है मोड़े कलाई मौत की इतनी तो हम में ताक़त है हम सरहदों के वास्ते लोहे की एक दीवार है हम दुश्मनों के वास्ते होशियार है तैयार है अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं| जोश दिल में जगाते चलो जीत के गीत गाते चलो जीत की जो तस्वीर बनाने हम निकले हैं अपनी लहू से हम को उस में रंग भरना है साथी मैंने अपने दिल में अब ये ठान लिया है या तो अब करना है या तो अब मरना है चाहें अंगारें बरसे के बिजली गिरे तू अकेला नहीं होगा यारा मेरे कोई मुश्किल हो या हो कोई मोर्चा साथ हर मोड़ पर होंगे साथी तेरे अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोदिल दुश्मन के हिलते हैं | इक चेहरा अक्सर मुझे याद आता है इस दिल को चुपके चुपके वो तड़पाता है जब घरसे कोई भी खत आया है कागज़ को मैंने भीगा भीगा पाया है हो, पलकों पे यादों के कुछ दीप जैसे जलते हैं कुछ सपने ऐसे हैं जो साथ साथ चलते हैं कोई सपना न टूटे कोई वादा न टूटे तुम चाहो जिससे दिल से वो तुमसे ना रूठे अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके पर्बत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोह दिल दुश्मन के हिलते हैं| चलता है जो ये कारवाँ गुंजी सी है ये वादियां है ये ज़मीन (गुंजी गुंजी) ये आसमान (गूंजा गूंजा) है ये हवा (गुंजी गुंजी) है ये समां (गूंजा गूंजा) हर रस्ते ने हर वादी ने हर पर्बत ने सदा दी हम जीतेंगे हम जीतेंगे हम जीतेंगे हर बाज़ी कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं | संकलन :सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी बु. ता. अर्धापूर जि. नांदेड २२. २३.हिंद के बहादुरो... हिंद के बहादुरो, वक्त की पुकार है बढना है बढना है, आगे सबसे बढना है......ध्रु दिलो मे जलती आग है, हथेलीयोमें जान है हौसले बुलंद है, गगन छुने वाले है आंधिया चले या बिजलिया गिरे हनुमानकी छलांग लेके, तीर बनके चलना है.......१ भूल जावो प्रांत भाषा, रंग भेदभाव को एकता के नामसे, सजावो हिंद भूमीको तुटेंगे नही, फुटेंगे नही कारवां हमारा यह कदम, कदम बढाना है......२ हम है दूत शांतीके, विश्व को बताना है जंगखोर हम नही, अतीत भी गवाह है यह बुद्ध की धरा, यह गांधी की की धरा नीती, धर्म-कर्म योग आज हमें लाना है हिंद के बहादूरो........३ लाला.......ला...... संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला २४.आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||धृ|| उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है बाट-बाट में हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती हैं बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||1|| ये हैं अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे बोल रही है कण कण से क़ुर्बानी राजस्थान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||2|| देखो मुल्क मराठों का यह यहां शिवाजी डोला था मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था हर पर्वत पे आग जली थी हर पत्थर एक शोला था बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था शेर शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||3|| जलियाँवाला बाग ये देखो यहीं चली थी गोलियां ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियां एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियां मरनेवाले बोल रहे थे इंक़लाब की बोलियां यहां लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||4|| ये देखो बंगाल यहां का हर चप्पा हरियाला है यहां का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम||5|| संकलक--अंजु जोशी बीड २५.चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु || हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 || जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 || जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3 || संकलक---अंजु जोशी बीड २६.एकता, स्वतंत्रता,समानता रहे देश मे चरित्र कि महानता रहे ||धृ|| कंठ है करोडो गीत एक राष्ट्र का, रंग है अनेक चित्र एक राष्ट्र का, रूप है अनेक भाव एक राष्ट्र का, शब्द है अनेक अर्थ एक राष्ट्र का, चेतना,समग्रता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||१|| विकास मे विवेक स्वप्न एक राष्ट्र का, योजना अनेक ध्यान एक राष्ट्र का, कर्म है अनेक लक्ष्य एक राष्ट्र का, पंथ है अनेक धर्म,एक राष्ट्र का, सादगी,सहिष्णुता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||२|| जाती है अनेक रक्त एक राष्ट्र का, पंक्ती है अनेक लेख एक राष्ट्र का, काम है अनेक अंग एक राष्ट्र का, हिरन है अनेक सूर्य एक राष्ट्र का, जागरण,मनुष्यता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||३|| संकलन:- मिनाक्षी प्रल्हादराव भटकर जि.प.उच्च प्राथमिक शाळा पानवाडी तालुका -आर्वी जिल्हा-वर्धा २७. अनेकता मे एकता अनेकता मे एकता हिंद की विशेषता एक राग के हे गीत ,गीत एक प्यार के!!धृ!! एक बाग के है फुल, फुल एक हार के देखती है यह जमीन आसमान देखता!!१ एक देश के हे अंग रंग भिन्नभिन्न आहै एक जनी भारती के नोटीस उत्तर अभिन्न आहे कोटी जीव बालको मे ब्रह्म एक खेलता!!२!! कर्म हे बडे हुए पर एक मूल मर्म है राष्ट्रभक्ती ही हमारा एक मात्र धर्म आहे कोटी कंठ कंठ का एक स्वर बीखेरता!!३!! एक लक्ष्य एक प्राण, प्रण से हम जुटे हुए एक भारती की अर्चना मे हम लगे हुए कोटी कोटी साधकों का एक राष्ट्र देवता!!४!! संकलन सौ.प्रतिभा पगारे २८.ध्वज उंच तिरंगा डोले रे ध्वज उंच तिरंगा डोले रे, ध्वज डोले रे (२) तो रवी चंद्राशी बोले रे!!धृ!! कोणी लढता लढता पडले रे (२) कोणी फासावरती चढले रे (२) यश त्यांचे गगना भिडले, गगना भिडले (२) का डोळे करिता ओले रे !!१!! जन हृदया बंधन कसले रे(२) चैतन्य असे रस-रसले(२) हे श्रेय अलौकिक असले ,अलौकिक असले(२) लाभले शिवाच्या मोले रे!!२!! स्वातंत्र्य बंधुता ,समता शांतता, अहिंसा, ममता ह्यांच्या स्तव हिंदी जनता, हिंदी जनता(२) ध्वज भुजदंडावर डोले रे!!३!! संकलन सौ.प्रतिभा पगारे २९ उठो हिंद के वीर सपूतो उठो हिंद के वीर सपूतो माँ ने तुम्हें पुकारा है खलिस्तान क्यों मांग रहे हो, हिंदुस्थान तुम्हारा है काश्मीर क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है बोरोलँड क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है आवाज दो हम एक है!!धृ!! हिंदू, मुस्लिम, सिख ,ईसाई, सब है भाई भाई प्रेम पाश में बंधे रहे तो, होगी नही लडाई एकही मंदिर मस्जिद गिरीजा, अलग नही गुरुद्वारा !!१!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है हम पंजाबी, हम बंगाली, गुजराती, मद्रासी लेकिन सबसे पहले हम है, केवल भारत वासी यही हमारा मूलमंत्र है, यही हमारा नारा!!२!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है सोना- चांँदी जो कुछ मांगो, हम देते है हिरा-मोती जो कुछ मांगो, हम देते है खून का कतरा कतरा मांगो, हम देते है महेल ठिकाणा जो कुछ मांगो, हम देते है तनका टुकडा टुकडा मांगो, हम देते है करो फैसला आज तुम्हे क्या, माँ का है बटवारा!!३!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्तान तुम्हारा है संकलन सौ.प्रतिभा पगारे 30.प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा चाल - कांची रे कांची रे प्रीत मेरी सांची प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा चमके हा धृवाचा तारा बंधूंनो चमके हा ध्रुवाचा तारा!!धृ!! ऋषीमुनी ,वाणी जन्मते इथे गंगा ,गोदा ,कृष्णा वाहते इथे अति पवित्र पावन ही भूमी वाहती नद्यांच्या धारा!!१!! प्यारा रे प्यारारे देश मेरा प्यारा आर्य,द्रविड,रजपूत संस्कृती भारी ब्रिटिश युग संपता,वाजे तुतारी इंग्रज ही गेले फ्रेंच ही गेले वर्षवी ममता तुषारा!!२!! प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा स्वातंत्र्याचा झेंडा मिरविला जगी स्वातंत्र्याचे बाहुबल आहे अंगी ना साथ डुलक्या पडक्या घराची लावू भवानी अंगारा हो!!३!! प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा संकलन सौ.प्रतिभा पगारे ए मेरे वतन के लोगो ए मेरे वतन के लोगो तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा दो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिये सुनो ये कहानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय खतरे मे पडी आजादी जब तक थी साँस लढे वो फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जब देश मे थी दिवाली वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने की धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बंदूक उठाके दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के जब अंत-समय आया तो कह गये के अब मरते है खुश रहना देश के प्यारो अब हम तो सफर करते है क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी तुम भूल न जाओ उनको इसलिये कही ये कहानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जय हिंद जय हिंद जय हिंद की सेना जय हिंद जय हिंद जय हिंद की सेना जय हिंद जय हिंद जय हिंद संकलक सौ.श्वेता राजेंद्र घरत ३१. गलत मत कदम उठाओ... गलत मत कदम उठाओ सोचकर चलो, विचार कर चलो राह की मुसीबतोंसे प्यार कर चलो.....ध्रु प्रणाम कर तिरंगे को, है हिंद का निशान मर मिटेंगे हम सभी, रखेंगे इसकी शान भाईयों चलो, बहनो तुम चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......१ वक्त की आवाज है, ये भुलना नही स्वतंत्रता की रक्षा करने, हटना नही शीष ले चलो, जान ले चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ........२ वीर शिवाजी, राणा के, भूमी में हम पले आझाद हिंद सेनाको, हम नही भूले नेफापे चलो, लद्दाख को चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......३ हिन्दु, बौद्ध, सिख, जैन, ख्रिस्ती पारसी एकता के ताजसे, सजी है भारती शिश झुकालो, तिलक लगालो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......४ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३२. ए वतन... ए वतन, ए वतन, जॉसे प्यारे वतन कर दु तुझेपे फिदा, अपना तन और मन.....ध्रु ए महकती हुयी, ठंडी ठंडी हवा झूम झूम उठे दिल, ऐसी रंगी फिजा तू तो है प्यार का मुस्कुराता चमन ए वतन, ए वतन.......१ तुझमें गांधी भी है, तुझमे नेहरू भी है तुझमें टिपू भी है, तुझमें आझाद भी तुने पैदा किये कैसे कैसे रतन ए वतन, ए वतन........२ गंगा जमुना तेरी, जैसी दो बेटीया जिनके दमसे हरी, होती है खेतीया सोना उगले जमी, लहराये चमन ए वतन, ए वतन.........३ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३३. ये मेरा वतन है... महका हुवा फुलोंसे, सदा मेरा चमन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है.......ध्रु बिखरे हुए हर मोडपे, दिलकश है नजारे भारतमें मेरे लोग तो, अनमोल है सारे मस्जिद भी है मंदिर भी, यहा गंगा चमन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है........१ रहते है यहा मिलकर, हर धरम के इन्सान सीनोमें धडकते है, यहा प्यार के अरमां सोने की धरती तो, सितारों का गगन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है........२ नफरत ना शिकायत ना, अदावत हो दिलोंमें बस प्यार हो अहसास, मोहब्बत हो दिलोंमें ये ऑख का तारा तो, अनमोल रतन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है.........३ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३४.भारत हमको जान से प्यारा है| भरत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ता हमारा है सदियों से भारत भूमी दुनिया की शान है भारतमाँकी रक्षा मे जीवन कुर्बान है| उजडे नही अपना चमन तुटे नही अपना वतन बुरीे राहना करदेे कोई मंदिर यहाँ मज्जीद यहां हिंदू यहा मुस्लीम यहा मिलते रहै हमसे प्यार हम प्यारसे हिन्दुस्तानी नाम हमारा सबसे प्यारा देश हमारा है जन्मभूमी है हमारी शान से कहेगे हम सभी को भाई भाई प्यार से कहेंगेहम आसामसे गुजरातक बंगाल से महाराष्ट्र तक जागी कही धून एक है भाषा कईसुर एक है काश्मीर से मद्रास तक कह दो सभी हम एक है| पि.के. मिश्रा संकलन -श्रीम.आशा भामरे जिल्हा परिषद शाळा शिलापूर नाशिक ३५.भारत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है भारत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है सदियों से भारत भूमी दुनियाँ की शान है भारत माँ की रक्षा में जीवन कुर्बान है भारत हमको जान से प्यारा हैं सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा हैं उजड़े नहीं अपना चमन टूटे नहीं अपना वतन गुमराह ना कर दे कोई बर्बाद ना कर दे कोई मंदिर यहाँ, मस्जिद यहाँ हिंदू यहाँ, मुस्लिम यहाँ मिलते रहे हम प्यार से जागो…… हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है जन्मभूमी हैं हमारी शान से कहेंगे हम सब ही तो भाई भाई प्यार से रहेंगे हम हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है आसाम से गुजरात तक बंगाल से महाराष्ट्र तक जाती कई -धुन एक हैं, भाषा कई -सूर एक है कश्मीर से मद्रास तक कह दो सभी हम एक है आवाज़ दो हम एक है जागो….. संकलन श्रीमती नूतन चौधरी जि.प.शाळा टेहेरे मालेगाव,नाशिक ३६. ये मेरा वतन है... मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुनके रहट की आवाज़ें यूं लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है क्यूं ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जनम लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा यहां अपना पराया कोई नहीं है सब पे है मां उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहां गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, ऐसे हैं अमन के फूल यहां रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… संकलन श्रीमती नूतन चौधरी मालेगाव,नाशिक ३७.नौ जवानो. नौ जवानो भारत की तकदीर बना दो फुलों को इस गुलशन से काटो को हटा दो ||धृ|| छोड के सारे भेदभाव को समझो देश हो अपना -२ रहना जाये देख अधुरा कोई सुंदर सपना-२ घर मे आग लगाये जो ,उस दीप को बुझा दो ||१|| हम भारत के वाशी क्यू हो दुनिया मे शरर्मिंदा-२ देश के कारण मौत भी है फिर भी रहेंगे जिंदा-२ जय जय हिंद के नारो से धरती को हिला दो ||२|| अपने साथ है कैसी कैसी बलवानों की शक्ती-२ वीर जवाहरलाल की हिंमत बापुजी की भक्ति-२ देश का झेंडा उॅंचा करके दिखा दो ||३|| संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ३८. वंदे मातरम् वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, भारत वंदे मातरम, जय भारत वंदे मातरम,रुकना पाहे तुफानो मे सबसे आगे बडे कदम जीवनपुष्प चढाने निकले माता के चरणों में हम ||धृ|| मस्तपर हिमराज विरहित, उन्नत माथा माता का चरणधोर हा विशाल सागर देश ही सुंदरता का हरियाली साडी पहनी मॉऽऽऽ हरियाली साडी पहनी मॉ गीत तुमहारे गाये हम ||१|| नदियन की पावन धारा है,मंगळ मला गंगा की कमरबंद है विद्याद्रिकी, सातपुडा की सेनीकी सह्याद्री का वज्रहस्त है ।ऽऽऽसह्याद्री का वज्रहस्त है । पौरुष को पहचाने हम ||२|| नही किसीके सामने अपने, अपना शीष झुकाया है। जो हमसे टकरायेगा,काल उसी का आया है। तेरा वैभव वैभव सदा रहे माॅ ऽऽऽतेरा वैभव वैभव सदा रहे माॅ विजय दर्ज पहराये हम ||३|| वंदे मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम्................. संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ३९.मनुष्य तू बडा महान है। धरती की शान तू है। मनु की संतान तेरे मुठ्ठीओमे बंद तुफान है रे । मनुष्य तू बडा महान है भूलो मत।मनुष्य तू बडा महान है।। तुजो चाहे पर्वत पहाड को फोड दे। तुजो चाहे नदी ओके मुख को भी मोड़ दे। तुजो चाहे माटी से अमृत भी छोड़ दे। तुजो चाहे धरती को अंबर से जोड दे। अमर तेरा प्राण ऽऽऽ-२मिला तुझको वरदान तेरी -आत्मा ओमे स्वंयभगवान है रे ||१|| नयनो ज्वाला तेरी गती में भू चाल है। तेरी छाती मे छुपा महाकाल है। पृथ्वी के लाल तेरी हिमगिरसा भाल । तेरी भुकू रोते तांडव का ताल है। निजको तु जान ऽऽऽ-२ जरा शक्ती पहचान रे तेरी बाहोमें थुम का आव्हान है रे ||२|| धरती सा धीर तुहे,अग्नीसा वीर तुहे। तुजो चाहे काल कोभी थाब ले। पपायो प्रलय रुके, पशुताका शिश झुके तुजो अगर हिंमत से काम ले। गुरूसा गतिमान ऽऽऽ-२ पवनसा तु साम गतिमान तेरी नभसे भी ऊंची उड्डान है रे ||३|| संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ४०.सबसे ऊॅंची विजय पताका सबसे उॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा मानवता का मानबिंदू यह भारत सबसे बड़ा रहेगा ।।धृ।। विंध्या की चट्टानों पर रेवा की यह गति तूफानी शत-शत वर्षा तक गाएगी जीवन की संघर्ष कहानी । इसके चरणों में नत होकर हिंदू महादधि पड़ा रहेगा सबसे उॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा।।1।। जिसकी मिट्टी में पारस है स्वर्ण -धूली उस बंगभूमि की पंचनदी के फव्वारों से सिंची बहारे पुण्य भूमि की। शीर्ष -बिंदु श्रीनगर सिंधु तक सेतुबंध भी अड़ा रहेगा सबसे ऊॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा ।।2।। जिस धरती पर चंदा सूरज साॅंझ सवेरे नमन चढ़ाते षड्-ऋतु के सरगम पर पंछी दीपक और मल्हार सुनाते । वही देश मणि माॅं वसुधा के हृदय हार में जड़ा रहेगा सबसे ऊॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा ।।3।। संकलन -मनिषा खामकर पुणे ४१.विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा झण्डा ऊँचा रहे हमारा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा ।।धृ।। सदा शक्ति बरसानेवाला प्रेम सुधा सरसानेवाला वीरों को हर्षानेवाला मातृभूमि का तन-मन सारा झण्डा ऊँचा ...।।१।। स्वतंत्रता के भीषण रण में लखकर कर जोश बढ़े क्षण-क्षण में काँपे शत्रु देख कर मन में मिट जावे भय संकट सारा झण्डा ऊँचा ...।।२।। इस झण्डे के नीचे निर्भय हो स्वराज जनता का निश्चय बोलो भारत माता की जय स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा झण्डा ऊँचा ...।।३।। शान न इस की जाने पावे चाहे जान भले ही जावे विश्व विजय कर के दिखलावे तब होवे प्रण पूर्ण हमारा झण्डा ऊँचा ...।।४।। रेखा शिंदे औरंगाबाद जि.प.प्रा.शाळा पाथ्री ४२.दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ...।।१।। धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई वाह रे फ़कीर खूब करामात दिखाई चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ..... रघुपति राघव राजा राम।।२।। शतरंज बिछा कर यहाँ बैठा था ज़माना लगता था मुश्किल है फ़िरंगी को हराना टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था ताना पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना मारा वो कस के दांव के उलटी सभी की चाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ..... रघुपति राघव राजा राम।।३।। जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े मज़दूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े हिंदू और मुसलमान, सिख पठान चल पड़े कदमों में तेरी कोटि कोटि प्राण चल पड़े फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी .... रघुपति राघव राजा राम।।४।। रघुपति राघव राजा राम मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोटी वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी दुनिया में भी बापू तू था इन्सान बेमिसाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ... रघुपति राघव राजा राम ।।५।। जग में जिया है कोई तो बापू तू ही जिया तूने वतन की राह में सब कुछ लुटा दिया माँगा न कोई तख्त न कोई ताज भी लिया अमृत दिया तो ठीक मगर खुद ज़हर पिया जिस दिन तेरी चिता जली, रोया था महाकाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल रघुपति राघव राजा राम।।६।। रेखा शिंदे औरंगाबाद जि.प.प्रा.शाळा पाथ्री समूह गीत हिंदी 1.इन्साफ की डगर पे बच्चे दिखाओ चलके यह देश है तुम्हारा नेता तुम्ही हो कल के दुनिया के रंज सहना और कुछ ना मुहसे कहना सच्चाई के बल पे आगे बढते रहना रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के इन्साफ की डगर पे //1// अपने हो या पराये सबके लिये हो न्याय देखो कदम तुम्हारा हरगीज डगमग आये रस्ते बडे कठीण आहे चलना संभल संभालके इंसाफ की डगर पे //2// इन्सानियत के सर पे इज्जत का ताज रखना तनमन की भेट देकर भारत की लाज रखना जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता जलके इंसाफ की डगर पे//3// संकलन सौ.अलका अनिल बामणे कन्या विद्या मंदिर उत्तूर ता.आजरा जि.कोल्हापूर समूह गीत. शिर्षक - दिल मेरा जान मेरी मेरा वतन.. 2. समूहगीत एक जगत की धरती माता, सब उसकी संतान ||धृ || भेदभावसे हम मुख मोडे | दुष्कर्मो का मार्ग छोडे | सब राष्ट्रो से नाता जोडे, बने गुणों की खान ||1|| सत्य, अहिंसा, प्रेम बढाये | देशभक्ती का दिप जलाए | जनसेवा को धर्म बनाए, रहे इसिमें ध्यान ||2|| दुर्जन को भी कर दे सज्जन | मानवतामय हो यह जीवन | सदा निती पर वाहे तनमन, बढे हमारी शान ||3|| संकलन : सौ. वागरे. जे. सी. जि. प. हा. लोणी ता. अर्धापूर जि. नांदेड

Friday, December 13, 2019

Blog निर्मिती - भाग 8*

📲 *आजच्या तंत्रज्ञान कार्यशाळेचा विषय - Blog निर्मिती - भाग 8*
  ♨  *मागील कार्यशाळेत ( Blog निर्मिती - भाग 7) या भागात आपण Google Drive चा उपयोग कसा करायचा तसेच गुगल ड्राईव्ह वर फाइल्स कशा  अपलोड करायच्या व Google Drive वर सेव्ह केलेल्या फाईलची लिंक आपल्या ब्लॉगवर कशी द्यायची ते पाहिले.*
       *आजच्या भागात आपण ब्लॉगवर Image Slideshow व Clock हे Gadgets कसे Add करायचे ते पाहणार आहोत.*

*STEP 1⃣ ब्लॉग निर्मिती भाग 4 मध्ये आपण ब्लॉग मध्ये Gadget कसे Add करायचे ते पाहिले आहे.*
     *त्या ठिकाणी दिलेल्या Gadgets च्या व्यतिरिक्त इतर Gadgets आपल्या ब्लॉगमध्ये कसे Add करायचे ते आता आपण पाहू या.*
     *सर्वप्रथम तुमच्या mobile / PC मधील Browser ओपन करा. Google page वर Search मध्ये Cincopa टाकून Ok करा.*
   *त्यानंतर ओपन होणाऱ्या page वर www.cincopa.com या website वर क्लिक करा.*
*STEP 2⃣ त्यानंतर Cincopa ही Website ओपन होईल. त्यात खाली Scroll केल्यानंतर Sign Up For Free ही Tab दिसेल त्या Tab वर क्लिक करा.*
‬: *STEP 3⃣ त्यानंतर पुढील page वर तुम्हाला विविध (Video / Image साठी) Templets दिसतील. त्यापैकी तुमच्या आवडीनुसार Image/Photo Slider चे Templete निवडा व त्याखाली असलेल्या USE THIS TEMPLETE या Tab वर क्लिक करा.*
*STEP 4⃣ त्यानंतर पुढील Page वर Templete Setting येईल. त्यात तुम्ही तुमच्या आवश्यकतेनुसार बदल करू शकतात.*
♦( *Gallery Title येथे तुम्ही तुमच्या Slideshow चे Title लिहू शकतात.*
*Gallery Description तेथे तुम्ही Slideshow चे विवरण लिहू शकतात.
Autoplay चे option On ठेवा.* )
‬: *STEP 5⃣ तुम्ही Basic Setting , Advanced , Overlay तसेच Misc या settings मध्ये तुमच्या आवश्यकतेनुसार बदल करू शकतात.*
    *सर्व Setting करून झाल्यानंतर वर असलेल्या Save या Tab वर क्लिक करा. तुम्ही बदल केल्याप्रमाणे तुमची Templet setting Save होईल. त्यानंतर USE THESE या Tab वर क्लिक करा.*
    *त्यानंतर sign in चे पेज ओपन होईल.*
*STEP 6⃣ तुम्ही प्रथमच website चा वापर करत असल्याने तुमचा Email id , Password व नाव टाकून ACCOUNT CREATE वर क्लिक करा.*
        
*त्यानंतर एक Page ओपन होईल. येथे तुम्ही तुमच्या Image Slideshow मध्ये टाकावयाचे फोटो select करून Upload करू शकतात.*
*STEP 7⃣ त्यानंतर तुमची Photo Gallery ओपन होईल. त्यातून तुम्हाला Image Slideshow मध्ये जे फोटो घ्यावयाचे आहेत ते  Photo Select करा व Ok वर क्लिक करा.*

*तुम्ही Select केलेले फोटो तुम्हाला अपलोड झालेले दिसतील.
तुम्ही प्रत्येक फोटो खाली Title व Description लिहू शकतात.*
    *त्यानंतर वरील कोपऱ्यातील NEXT या Tab वर क्लिक करा.*


*STEP 8⃣ त्यानंतर पुढील Page वर HTML code दिसेल. खाली असलेल्या COPY EMBED CODE या Tab वर क्लिक करून code कॉपी करा.*
*STEP 9⃣ आता आपण आपल्या ब्लॉगमध्ये हे Gadget ( Image Slideshow ) Add करण्यासाठी आपण Copy केलेला Code कसा व कोठे paste करायचा ते पाहू या.
यासाठी सर्वप्रथम कोणत्याही Browser मध्ये www.blogger.com टाकून OK करा. तुम्ही Directly Blogger page वर येणार.*
*( टिप – त्यासाठी तुम्ही Sign in असणे आवश्यक आहे. तुम्ही Sign in नसल्यास , Sign in चे Page येईल त्यात तुमचा email id व password टाकून login करा. )*
      *ब्लॉगर पेज ओपन झाल्यानंतर Gadget Add करण्यासाठी Layout या Tab वर क्लिक करा.*


*STEP 1⃣0⃣ त्यानंतर Layout चे पेज ओपन होईल. ज्या ठिकाणी आपल्याला slideshow Add करायचा आहे , तेथील Add a Gadget वर क्लिक करा.*
‬: *STEP 1⃣1⃣ Add a Gadget यावर क्लिक केल्यानंतर एक विंडो ओपन होईल.यात आपल्याला विविध Gadgets दिसतील.
त्यातील HTML / JavaScript या Gadget समोरील + या चिन्हावर क्लिक करा.*
*STEP 1⃣2⃣ त्यानंतर एक Window ओपन होईल त्यात तुम्ही Copy केलेला HTML code Paste करा. त्यानंतर खाली असलेल्या Save या Tab वर क्लिक करा.*
https://moykhede.blogspot.com/p/taya.html?m=1

Wednesday, June 19, 2019

Blog कसा बनवाल

Blog कसा बनवाल




ब्लॉग वेबसाइट कशी बनवायची ?



1 ब्लॉग तयार करण्यास स्वतःचा Gmail id व Password असणे आवश्यक आहे.
2 प्रथमतः www.blogger.com वर जा.
3 तेथे Gmail चा login id / username व password टाकून login / sign in करा.
4 यानंतर New Blog ला click करा.
5 पुढे Blog चे (Tital )शिर्षक व तुम्हाला ठेवायचा Blog address टाका.
जसे e.g  ]
6 त्याखालील हवे ते Template निवडा .
7 create blog ला click करा .
8 निवडलेल्या Template  वर Blog ची रचना अवलंबून असते .
9 आता new post वर click करा .
10 MS Word प्रमाणे Page open होईल .
11 तेथे आपली post तयार करा .
12 नंतर publish करा .
13 समोरील view blog करून आपली blog website पहा .
14 नंतर layout वर जा तेथे header मधे blog मुखपृष्ठासाठी Photo add करा .
15 त्याखालील gadget वर क्लिक करा .
16 त्यात आगोदर तयार केलेली pages select करून save करा .
17 हे पेजेस तुम्हाला blog च्या मुखपृष्ठावर आडवी दिसतील .
18 Pages tab टाकण्यास - new page click करा व त्याचे Title टाकून तयार करा .
19 माहिती तयार असल्यास भरा फोटो टाका .
20 नंतर खालील add gadget वर क्लिक करा व हवी ती gadget add करा.
21 आता layout page च्या डाव्या बाजूला Template designer वर क्लिक करून ब्लॉग design    करता येते .
22 layout वर sidebar कसे हवे ते select करा व apply to blog करा .
23 शेवट advanced menu वर क्लिक करून रंगसंगती 🎨 ठरवा .
24 खाली तुम्हाला live blog दिसेल .
25 सर्व रचना झाली की apply to blog करायला विसरू नका .
26 आपल्या इतर फाईल Google drive , Dropbox वर Save करून तेथील link copy  करून       ब्लॉग वर हवी तेथे pest करू शकता .

  आपणांस आपला ब्लॉग बनविण्यास हार्दिक शुभेच्छा !

मराठी व्याकरण



मराठी व्याकरण




मराठी संपुर्ण व्याकरण इ.१ ते ८ सोप्या भाषेत
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🔸🔶मराठी व्याकरण
1}नाम - जे शब्द प्रत्यक्ष किंवा काल्पनिक वस्तूची, वस्तूच्या गुणांची नावे असतात अशा शब्दांना नाम असे म्हणतात.
          उदाहरण - घर, आकाश, गोड
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2}    सर्वनाम - जे शब्द नामाच्या ऐवजी वापरले जातात त्या शब्दांना सर्वनाम असे म्हणतात.
      उदाहरण - मी, तू, आम्ही
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3}    विशेषण - जे शब्द नामाबद्दल जास्त माहिती सांगतात त्या शब्दांना विशेषण असे म्हणतात.
     उदाहरण - गोड, उंच

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4}    क्रियापद - जे शब्द वाक्यातील क्रिया दाखवतात व त्या वाक्याचा अर्थ पूर्ण करतात त्या शब्दांना क्रियापद असे म्हणतात.
      उदाहरण - बसणे, पळणे

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 5}   क्रियाविशेषण - जे शब्द क्रियापदाबद्दल जास्त माहिती सांगतात त्या शब्दांना क्रियाविशेषण असे म्हणतात.
      उदाहरण - इथे, उद्या

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  6}  शब्दयोगी अव्यय - जे शब्द नामांना किंवा सर्वनामांना जडून येतात व वाक्यातील शब्दांचा संबंध दाखवतात त्या शब्दांना शब्दयोगी अव्यय असे म्हणतात.
      उदाहरण - झाडाखाली, त्यासाठी
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  7}  उभयान्वयी अव्यय - जे शब्द दोन शब्द किंवा वाक्य यांना जोडतात त्या शब्दांना उभयान्वयी अव्यय असे म्हणतात.
      उदाहरण - व, आणि, किंवा

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  8}  केवलप्रयोगी अव्यय - जे शब्द आपल्या मनातील वृत्ती किंवा भवन व्यक्त करतात त्या शब्दांना केवलप्रयोगी अव्यय असे म्हणतात.
     उदाहरण - अरेरे, अबब
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•●•~~शब्द विकाराचे प्रकार~~•●•
काही शब्द जेंव्हा वाक्यात वापरले जातात तेंव्हा मूळ शब्दास प्रत्यय लागून त्यात बदल होतो किंवा शब्द जसाच्या तसा वापरला जातो. ज्या विविध कारणामुळे मुळ शब्दात बदल घडतो ती कारणे पाच विभागात मोडतात.
१) वचन २) लिंग ३) पुरुष ४) विभक्ती ५) काळ
-------------•○●वचन●○•-------------
एखाद्या नामावरून ती वस्तू एक आहे का अनेक आहेत हे कळते त्याला वाचन असे म्हणतात. वाचनाचे एकूण २ प्रकार आहेत.
1)   एकवचन : ज्या नामावरून त्या वस्तूची संख्या एक आहे असे समजते, तेंव्हा त्या नामाचे वचन एकवचन मानले जाते.
      उदाहरण - अंबा, घोडा, पेढा
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2)  अनेकवचन : ज्या नामावरून त्या वस्तूची संख्या एकपेक्षा जास्त आहे असे समजते, तेंव्हा त्या नामाचे वचन अनेकवचन मानले जाते.
      उदाहरण - अंबे, घोडे, पेढे
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----------•○●लिंग●○•------------
एखाद्या नामावरून ती वस्तू पुरुषजातीची, स्त्रीजातीची किंवा भिन्न जातीची आहे हे कळते त्याला त्या नामाचे लिंग असे म्हणतात. लिंगाचे एकूण ३ प्रकार आहेत.

1)  पुल्लिंग : ज्या नामावरून ती वस्तू पुरुषजातीची आहे असे समजते, तेंव्हा त्या नामाचे लिंग पुल्लिंग समजावे.
      उदाहरण - मुलगा, घोडा, कुत्रा
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2)   स्त्रीलिंग : ज्या नामावरून ती वस्तू स्त्रीजातीची आहे असे समजते, तेंव्हा त्या नामाचे लिंग स्त्रीलिंग समजावे.
उदाहरण - मुलगी, घोडी, कुत्री
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3) नपुंसकलिंग : ज्या नामावरून ती वस्तू पुरुषजातीची किंवा स्त्रीजातीची आहे हे समजत नाही, तेंव्हा त्या नामाचे लिंग नपुसंकलिंग समजावे.
      उदाहरण - मुल, पिल्लू, पाखरू
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-------------•••पुरुष•••-----------------
एखाद्या नामावरून बोलणारा , ज्याच्याशी बोलायचे तो व ज्याविषयी बोलयचे त्या सर्व नामाला पुरुषवाचक सर्वनामे म्हणतात. पुरुषवाचक सर्वनामाचे ३ प्रकार आहेत.
      प्रथम पुरुषवाचक : बोलणारा किंवा लिहिणारा स्वतःचा उल्लेख करण्यासाठी ज्या सर्वानामाचा उपयोग करतो त्या सर्वनामाला प्रथम पुरुषवाचक सर्वानाम म्हणतात.
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      द्वितीय पुरुषवाचक: : ज्याच्याशी बोलायाचे त्या व्यक्तीचा किंवा वस्तूचा उल्लेख करण्यासाठी ज्या सर्वानामाचा उपयोग करतात त्या सर्वनामाला द्वितीय पुरुषवाचक सर्वानाम म्हणतात.
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      तृतीय पुरुषवाचक : ज्याच्या विषयी बोलायचे त्या व्यक्तीचा किंवा वस्तूचा उल्लेख करण्यासाठी ज्या सर्वानामाचा उपयोग करतात त्या सर्वनामाला तृतीय पुरुषवाचक सर्वानाम म्हणतात.
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-----------•○●विभक्ती●○•----------
वाक्यात येणार्‍या नामांचा व सर्वनामांचा क्रियापदाशी किंवा इतर शब्दांशी प्रत्यक्ष किंवा अप्रत्यक्ष संबध असतो व हा संबंध दाखवण्या साठी जो नामात किंवा सर्वानामात बदल करतात त्याला विभक्ती असे म्हणतात. विभक्तीचे एकूण ८ प्रकार आहेत.
[स्पष्टोच्चारित अनुनासिकाबद्दल
शीर्षबिंदू द्यावा.
उदाहरणार्थ: गुलकंद , चिंच, तंटा , आंबा
नियम १.२ [ संपादन ]
तत्सम शब्दातील अनुनासिकाबद्दल
विकल्पाने पर-सवर्ण लिहिण्यास हरकत
नाही.मात्र अशा वेळी अनुस्वारानंतर
येणाऱ्या अक्षराच्या वर्गातील
अनुनासिकच पर-सवर्ण म्हणून वापरावे.
उदाहरणार्थ: 'पंकज=पङ्कज', पञ्चानन,
पंडित=पण्डित, अंतर्गत=अन्तर्गत,
अंबुज=अम्बुज.
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नियम १.३ [ संपादन ]
पर-सवर्ण लिहिण्याची सवलत फक्त तत्सम
शब्दांपुरती मर्यादित आहे. संस्कृत नसलेले
मराठी शब्द शीर्षबिंदू ( अनुस्वार) देऊनच
लिहावेत.
उदाहरणार्थ: 'दंगा, झांज, बंड, खंत, संप' हे
शब्द 'दङ्गा, झाञ्ज, बण्ड, खन्त, सम्प' असे
लिहू नयेत.
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नियम १.४ [ संपादन ]
अर्थभेद स्पष्ट करण्यासाठी कधीकधी पर-
सवर्ण जोडून शब्द लिहिणे योग्य ठरते.
उदाहरणार्थ:
वेदांत=वेदांमध्ये, वेदान्त= तत्वज्ञान,
देहांत=शरीरांमध्ये, देहान्त= मृत्यू.
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नियम १.५ [ संपादन ]
काही शब्दांमधील अनुस्वारांचा उच्चार
अस्पष्ट असतो. कधीकधी तो
उच्चारलादेखील जात नाही. अशा शब्दांवर
अनुस्वार देऊ नये.
उदाहरणार्थ: 'हंसणे, धांवणे, जेव्हां, कोठें,
कधीं, कांही' हे शब्द 'हसणे, धावणे, जेव्हा,
कोठे, कधी, काही' असे लिहावेत.
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नियम २: [संपादन ]
अनुस्वार
नियम २.१ [ संपादन ]
य्, र्, ल्, व्, श्, ष्, स्, ह् यांच्यापूर्वी येणाऱ्या
अनुस्वारांबद्दल केवळ शीर्षबिंदू द्यावा.
'ज्ञ' पूर्वीचा नासोच्चारही केवळ
शीर्षबिंदूने दाखवावा.
उदाहरणार्थ: संयम, संरचना, संलग्न, संवाद,
दंश, दंष्ट्रा, मांस, सिंह, संज्ञा' हे शब्द
'संय्यम, संव्रचना, संल्लग्न, संव्वाद, दंव्श,
दंव्ष्ट्रा, मांव्स, सिंव्ह, संव्ज्ञा' असे लिहू
नयेत.
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नियम ३ [संपादन ]
अनुस्वार
नियम ३.१ [ संपादन ]
नामांच्या व सर्वनामांच्या अनेकवचनी
सामान्यरूपांवर विभक्तिप्रत्यय व
शब्दयोगी अव्यय लावताना अनुस्वार
द्यावा.
उदाहरणार्थ: लोकांना, मुलांनी,
तुम्हांस, लोकांसमोर, घरांपुढे.
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नियम ३.२ [ संपादन ]
आदरार्थी बहुवचनाच्या वेळीही असा
अनुस्वार दिला पाहिजे.
उदाहरणार्थ: राज्यपालांचे,
मुख्यमंत्र्यांचा, तुम्हांला, आपणांस,
शिक्षकांना, अध्यक्षांचे.
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नियम ४ [संपादन ]
अनुस्वार वरील नियमांव्यतिरिक्त
कोणत्याही कारणांसाठी - व्युत्पत्तीने
सिद्ध होणारे वा न होणारे - अनुस्वार देऊ
नयेत.
या नियमानुसार 'घंरे, पांच, करणें, काळीं,
नांव, कां, कांच, जों, घरीं' हे शब्द 'घरे,
पाच, करणे, काळी, नाव, का, जो, घरी'
असे लिहावेत.
==================================




नियम५ [संपादन ]
ऱ्हस्व-दीर्घ नियम
नियम५.१ [संपादन ]
मराठीतील तत्सम इ-कारान्त आणि उ-
कारान्त शब्द दीर्घान्त लिहावेत.
उदाहरणार्थ : कवि=कवी, बुद्धि=बुद्धी,
गति=गती.
इतर शब्दांच्या अंती येणारा इकार व
उकार दीर्घ लिहावा.
उदाहरणार्थ: पाटी, जादू, पैलू
==================================





नियम५.२ [संपादन ]
'परंतु, यथामति, तथापि', ही तत्सम
अव्यये ऱ्हस्वान्त लिहावीत.
==================================




नियम ५.३ [ संपादन ]
व्यक्तिनामे , ग्रंथनामे , शीर्षके व सुटे
ऱ्हस्वान्त तत्सम शब्द मराठीत दीर्घान्त
लिहावेत.
उदाहरणार्थ: हरी, मनुस्मृती, वर्गीकरण,
पद्धती, कुलगुरू.
==================================




नियम ५.४ [ संपादन ]
'आणि' व 'नि' ही मराठीतील दोन
अव्यये ऱ्हस्वान्त लिहावीत.
==================================

नियम ५.५ [ संपादन ]
सामासिक शब्द लिहिताना समासाचे
पूर्वपद (पहिला शब्द) तत्सम ऱ्हस्वान्त असेल
(म्हणजेच मुळात संस्कृतमध्ये ऱ्हस्वान्त असेल) तर
ते पूर्वपद ऱ्हस्वान्तच लिहावे. दीर्घान्त असेल
तर दीर्घान्तच लिहावे.
उदाहरणार्थ: बुद्धि -बुद्धिवैभव, लक्ष्मी -
लक्ष्मीपुत्र.
साधित शब्दांनाही हाच नियम लावावा.
उदाहरणार्थ: बुद्धि-बुद्धिमान, लक्ष्मी-
लक्ष्मीसहित.
==================================




नियम ५.६ [ संपादन ]
'विद्यार्थिन्, गुणिन्, प्राणिन्, पक्षिन्'
या सारखे इन्-अन्त शब्द मराठीत येतात
तेव्हा त्यांच्या शेवटी असलेल्या न् चा
लोप होतो व उपान्त्य ऱ्हस्व अक्षर दीर्घ
होते. परंतु हे शब्द समासात पूर्वपदी आले
असता (म्हणजेच समासातील पहिला
शब्द असता) ते ऱ्हस्वान्तच लिहावेत.
उदाहरणार्थ
विद्यार्थिमंडळ , गुणिजन, प्राणिसंग्रह ,
स्वामिभक्ती, पक्षिमित्र, योगिराज.
==================================




नियम ६ [संपादन ]
ऱ्हस्व-दीर्घ नियम
मराठी शब्दातील शेवटचे अक्षर दीर्घ असेल
तर त्याचा उपान्त्य (म्हणजेच शेवटच्या
अक्षराच्या अलीकडचा) इकार किंवा उकार
ऱ्हस्व लिहावा.
उदाहरणार्थ किडा, विळी, पिसू, इथे,
निघो, फुगा, खुनी, सुरू, कुठे, उठो.
मात्र तत्सम शब्दांना हा नियम लागू
नाही. तत्सम शब्दातील उपान्त्य
इकार किंवा उकार मुळाप्रमाणे ऱ्हस्व
किंवा दीर्घ लिहावेत.
उदाहरणार्थ: पूजा, गीता, अनुज्ञा,
दक्षिणा
==================================





नियम ७ [संपादन ]
ऱ्हस्व-दीर्घ नियम
नियम ७.१ [ संपादन ]
मराठी अ-कारान्त शब्दाचे उपान्त्य इकार व
उकार दीर्घ लिहावेत.
उदाहरणार्थ: कठीण, नीट, रतीब,
विहीर, ऊस, चिरूट, तूप, मूल.
तत्सम (मुळात संस्कृत असलेल्या) अ-कारान्त
शब्दांतील उपान्त्य इकार व उकार मुळ
प्रमाणे ऱ्हस्व किंवा दीर्घ लिहावेत.
उदाहरणार्थ: गणित , विष, गुण, मधुर, दीप,
न्यायाधीश , रूप, व्यूह
==================================




नियम ७.२ [ संपादन ]
मराठी शब्दांतील अनुस्वार, विसर्ग,किंवा
जोडाक्षर, यांच्या पूर्वीचे इकार व उकार
सामान्यत: ऱ्हस्व लिहावेत.
उदाहरणार्थ: चिंच , डाळिंब , भिंग , खुंटी ,
पुंजका , भुंगा , छि:, थु:, किल्ला , भिस्त,
विस्तव, कुस्ती, पुष्कळ, मुक्काम.
परंतु तत्सम शब्दांत ते मुळाप्रमाणे ऱ्हस्व,
किंवा दीर्घ लिहावेत.
उदाहरणार्थ: अरविंद, चिंतन, कुटुंब , चुंबक ,
नि:पक्षपात , नि:शस्त्र, चतू:सूत्री , दु:ख ,
कनिष्ठ, मित्र, गुप्त, पुण्य , ईश्वर ,
नावीन्य, पूज्य , शून्य .
==================================





नियम ८ [संपादन ]
ऱ्हस्व-दीर्घ नियम
नियम ८.१ [ संपादन ]
उपान्त्यी दीर्घ ई किंवा ऊ असलेल्या
मराठी शब्दांचा उपान्त्य ई-कार किंवा ऊ-
कार उभयवचनी सामान्यरूपांच्या वेळी
ऱ्हस्व लिहावा.
उदाहरणार्थ: गरीब-
गरिबाला,गरिबांना,चूल-
चुलीला,चुलींना.
अपवाद-दीर्घोपान्त्य तत्सम शब्द .
उदाहरणार्थ:परीक्षा-परीक्षेला,
परीक्षांना, दूत-दूताला, दूतांना.
==================================




नियम ८.२ [ संपादन ]
मराठी शब्द तीन अक्षरी असून त्याचे पहिले
अक्षर दीर्घ असेल तर अशा शब्दाच्या
सामान्यरूपात उपान्त्य ई-ऊ यांच्या जागी
'अ' आल्याचे दिसते.
उदाहरणार्थ: बेरीज-
बेरजेला,बेरजांना,लाकूड-
लाकडाला,लाकडांना.
मात्र पहिले अक्षर र्ह्स्वअसल्यास हा
'अ' विकल्पाने (पर्यायी) होतो.
उदाहरणार्थ:परीट-पर(रि)टास,पर
(रि)टांना
==================================





नियम ८.३ [ संपादन ]
शब्दांचे उपान्त्य अक्षर 'ई' किंवा 'ऊ' असेल तर
अशा शब्दाच्या उभयवचनी
सामान्यरूपाच्या वेळी 'ई' च्या जागी 'य'
आणि 'उ' च्या जागी 'व' असे आदेश होतात.
उदाहरणार्थ:काईल-कायलीला,देउळ-
देवळाला,देवळांना
==================================




नियम ८.४ [ संपादन ]
पुल्लिंगी शब्दाच्या शेवटी 'सा' असल्यास
त्या जागी उभयवचनी सामान्यरूपाच्या
वेळी 'शा' होतो.('श्या' होत नाही)
उदाहरणार्थ: घसा-
घशाला,घशांना,ससा-सशाला,सशांना
==================================




नियम ८.५ [ संपादन ]
पुल्लिंगी शब्दाच्या शेवटी 'जा' असल्यास
उभयवचनी सामान्यरूपाच्या वेळी तो
तसाच राहतो (त्याचा 'ज्या' होत नाही.)
उदाहरणार्थ:दरवाजा-
दरवाजाला,दरवाजांना; मोजा-
मोजाला,मोजांना.
==================================




नियम ८.६ [ संपादन ]
तीन अक्षरी शब्दातील मधले अक्षर 'क' चे
किंवा 'प' चे द्वित्व असेल तर उभयवचनी
सामान्यरूपाच्या वेळी हे द्वित्व नाहीसे
होते.
उदाहरणार्थ:रक्कम-रकमेला,रकमांना;
छप्पर-छपराला,छपरांना
==================================




नियम ८.७ [ संपादन ]
मधल्या 'म' पूर्वीचे अनुस्वारसहित अक्षर
उभयवचनी सामान्यरूपाच्या वेळी
अनुस्वारविरहित होते.
उदाहरणार्थ:किंमत-
किमतीला,किमतींना; गंमत-
गमतीला,गमतींचा
==================================




नियम ८.८ [ संपादन ]
ऊ-कारान्त विशेषनामाचे सामान्यरूप होत
नाही.
उदाहरणार्थ:गणू-गणूस; दिनू-दिनूला.

==================================




नियम ८.९ [ संपादन ]
धातूला 'ऊ' किंवा 'ऊन' प्रत्यय लावताना
धातूच्या शेवटी 'व' असेल तरच 'वू' आणि 'वून'
अशी रूपे होतात.पण धातूच्या शेवटी 'व' नसेल
तर 'ऊ' किंवा 'ऊन' अशी रूपे होतात
उदाहरणार्थ:धाव-धावू,धावून; गा-
गाऊ,गाऊन; कर-करू,करून.
किरकोळ (इतर)

==================================





नियम ९ [संपादन ]
पूर हा ग्रामवाचक कोणत्याही
ग्रामनामास लावताना दिर्घोपान्त्य
लिहावा.
उदाहरणार्थ : नागपूर,तारापूर,सोलापूर
==================================





नियम १० [संपादन ]
"कोणता,एखादा' ही रूपे लिहावीत.
'कोणचा,एकादा' ही रूपे लिहू नयेत.
==================================




नियम ११ [संपादन ]
'खरीखरी,हळूहळू' यासारख्या पुनरुक्त
शब्दांतील दुसरा व चौथा हे स्वर मूळ घटक
शब्दांमध्ये ते दीर्घ असल्याने ते दीर्घ
लिहावेत, परंतु पुनरुक्त शब्द नादानुकारी
असतील तर ते उच्चाराप्रमाणे ऱ्हस्व
लिहावेत.
उदाहरणार्थ:दुडुदुडु,रुणुझुणु,लुटुलुटु.
==================================





नियम १२ [संपादन ]
एकारान्त नामाचे सामान्यरूप या-कारान्त
करावे.ए-कारान्त करू नये.
उदाहरणार्थ : करणे-करण्यासाठी,फडके-
फडक्यांना.
==================================




नियम १३ [संपादन ]
लेखनात पात्राच्या किंवा वक्त्याच्या
तोंडी बोलण्याची भाषा घालावी
लागते.त्या वेळी तिचे स्वरूप बोलण्यातील
उच्चाराप्रमाणे अनुस्वारयुक्त असावे.
उदाहरणार्थ: 'असं केलं , मी म्हटलं;त्यांनी
सांगितलं अन्य प्रसंगी ही रूपे ए-कारान्त
लिहावीत. उदाहरणार्थ : असे केले;मी
म्हटले;त्यांनी सांगितले
==================================





नियम १४ [संपादन ]
'क्वचित्,
कदाचित्,अर्थात्,अकस्मात्,विद्वान्,'
यांसारखे मराठीत रूढ झालेले तत्सम शब्द
अ-कारान्त लिहावेत.
उदाहरणार्थ : 'क्वचित,
कदाचित,अर्थात,अकस्मात,विद्वान,'
कोणत्याही अन्य भाषेतील शब्द
लिहिण्याची गरज पडेल तेव्हा त्या
भाषेतल्या उच्चाराप्रमाणे लेखन करावे.
उदाहरणार्थ :
'डिक्शनरी,ब्रिटिश,हाऊस.
इंग्रजी शब्द ,पदव्या किंवा त्यांचे संक्षेप
यांच्या शेवटचे अक्षर आता व्यंजनान्त
म्हणजे पाय मोडके लिहू नये.
उदाहरणार्थ :'एम.ए. , पीएच.डी.,
अमेरिकन,वॉशिंग्टन .
==================================





नियम १५ [संपादन ]
केशवसुतपूर्वकालीन पद्य व विष्णुशास्त्री
चिपळूणकरपूर्वकालीन गद्य यांतील उतारे
छापताना ते मुळानुसार छापावेत तदनंतरचे
( केशवसुत व चिपळूणकर यांच्या लेखनासह) लेखन
' अ. भा. मराठी साहित्य महामंडळाच्या
प्रस्तुत लेखन नियमांस अनुसरून छापावे.
केशवसुतांचा काव्यरचना काल १८८५
-१९०५
चिपळूणकरांचा लेखनकाल १८७४-१८८२
==================================




नियम १६ [संपादन ]
राहणे, पाहणे, वाहणे अशी रूपे वापरावीत
'रहाणे, राहाणे, पहाणे, वहाणे, वाहाणे,
अशी रूपे वापरू नयेत.
आज्ञार्थी प्रयोग करताना मात्र
'राहा, पाहा, वाहा' या बरोबरच 'रहा,
पहा, वहा' अशी रूपेही वापरण्यास हरकत
नाही.
==================================




नियम १७ [संपादन ]
'इत्यादी' व 'ही' हे शब्द दीर्घांन्त
लिहावेत . 'अन्' हा शब्द व्यंजनान्त
लिहावा.
==================================




नियम १८ [संपादन ]
पद्यात वृत्ताचे बंधन पाळy     ताना ऱ्हस्व-
दीर्घाच्या बाबतीत हे नियम
काटेकोरपणे पाळणे शक्य नसल्यास
कवीला तेवढ्यापुरते स्वातंत्र्य असावे.
==================================
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