Friday, July 3, 2020

देशभक्ती गीत


हिंदी देशभक्ती/समूह गीत 1.मेरे देश की धरती बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कमल मुस्काते हैं सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अँगड़ाइयाँ लेती है क्यों ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जन्म लिया उसने ही पाया प्यार तेरा यहाँ अपना पराया कोई नही हैं सब पे है माँ उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती ये बाग़ हैं गौतम नानक का खिलते हैं अमन के फूल यहाँ गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ रंग हरा हरिसिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगतसिंह से रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती *संकलक* श्रीमती सोनाली मधुकर साळुंखे शाळा-मामलदे तालुका-चोपडा जिल्हा-जळगाव 2. कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो ,दिल दुश्मन के हिलते हैं , अब तो हमें आगे बढते है रहना , अब तो हमें साथी, है बस इतना ही कहना, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना , अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो, दिल दुश्मन के हिलते हैं , निकले हैं मैदान पर, हम जान हथेली पर लेकर , अब देखो दम लेंगे हम, जाके अपनी मंजिल पर , खतरों से हंसके खेलना, इतनी तो हममे हिम्मत है , मोड़े कलाई मौत की , इतनी तो हममे ताक़त है , हम सरहदों के वास्ते, लोहे की इक दीवार हैं , हम दुशमन के वास्ते, होशीयार हैं तैयार हैं , अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना , अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो, जोश दिल में जगाते चलो, जीत के गीत गाते चलो, जीत की तो तस्वीर बनाने , हम निकले हैं अपने लहू से, हम को उस में रंग भरना है, साथी मैंने अपने दिल में अब यह ठान लिया है , या तो अब करना है, या तो अब मरना है , चाहे अंगारें बरसे या बर्फ गिरे , तू अकेला नहीं होगा यारा मेरे , कोई मुश्किल हो या हो कोई मोर्चा, साथ हर हाल में होंगे साथी तेरे, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , इक चेहरा अक्षर मुझे याद आता है, इस दिल को चुपके चुपके वो तड़पाता है, जब घर से कोई भी ख़त आया है, कागज़ वो मैंने भीगा भीगा पाया है, पलकों पलकों पर यादों के कुछ दीप जैसे जलते हैं, कुछ सपने ऐसे हैं जो साथ साथ चलते हैं, कोई सपना न टूटे, कोई वादा न टूटे, तुम चाहो जिसे दिल से वो तुमसे न रूठे, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना , कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं , चलता है जो यह कारवां , गूंजी सी है यह वादियाँ, है यह ज़मीन , यह आसमान, है यह हवा, है यह समां, हर रास्ते ने, हर वादी ने, हर परबत ने सदा दी, हम जीतेंगे, हम जीतेंगे , हम जीतेंगे हर बाज़ी, अब जो भी हो, शोला बनके पत्थर है पिघलाना, अब जो भी हो , बादल बनके परबत पर है छाना, कन्धों से कंधे मिलते है, कदमो से कदम मिलते हैं, हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं संकलक श्रीमती सोनाली मधुकर साळुंखे शाळा-मामलदे तालुका-चोपडा जिल्हा-जळगाव 3.हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन होगी शान्ति चारों होगी शान्ति चारों ओर होगी शान्ति चारों ओर एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास होगी शान्ति चारों ओर एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन हम चलेंगे साथ साथ डाले हाथों में हाथ हम चलेंगे साथ साथ एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम चलेंगे साथ साथ एक दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन नहीं डर किसी का आज नहीं भय किसी का आज नहीं डर किसी का आज के दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास नहीं डर किसी का आज के दिन हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन गितकार-गिरिजाकुमार माथुर 4.रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी.. गीतकार- पंडित विनयचन्द्र मौद्गल्य [5/30, 8:13 AM] +91 94218 58326: 5.जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा वो भारत देश है मेरा जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा वो भारत देश है मेरा ||१|| ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा वो भारत देश है मेरा ||२|| अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा वो भारत देश है मेरा ||३ || जब आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा वो भारत देश है मेरा ||४ || संकलन:- चित्रा गोतमारे. ता. नेर, जि. यवतमाळ. 6.हर देश मे तू हर देश में तू,हर भेष में तू , तेरे नाम अनेक तू एक ही है | तेरी रंगभूमि वह विश्व भरा, सब खेल खेल में तू ही तू है ||१ || सागर से उठा बादल बनके, बादल से फटा जल होकर के | फिर नहर बना, नदियां गहरी तेरे भिन्न प्रकार तू ही एक है ||२|| चिटीयों से अणु परमाणु बना, सब जीव जगत का रूप लिया, कहीं पर्वत वृक्ष विशाल बना, सौंदर्य तेरा तू एक ही है ||३|| यह दिव्य दिखाया है जिसने, वह है गुरुदेव की पूर्ण दया, तुकड्या कहे और न कोई दिखा, बस मै और तू, सब एक ही है ||३|| संकलन:- चित्रा गोतमारे. ता. नेर, जि. यवतमाळ. 7.ऐ प्यारी भारत माॕ ऐ प्यारी भारत माँ ‌तेरे हम गीत गाते हे| गुनगुनाते हे खुशी से गीत गाते है, ऐ प्यारी भारत माँ||धृ|| स्वर लहरों का गुंजन माॅं, झरझर झर के झरनों में हसी खुशी का नर्तन माॅं, थिरप थिरप किया मोरोंने||१|| जिना हमने सिखा माँ, छञपती शिवराजा से| मरना हमने सिखा माँ, शेर शंभू राजा से| जिना मरना तेरे कारण, शपथ उठाते है||२|| ‌ऐ प्यारी भारत माँ..... 8.सारे जहाँ से अच्छा सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी, वो गुलसितां हमारा गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा, सारे ... पर्वत हो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का वो संतरी हमारा, वो पासवां हमारा, सारे ... गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनां हमारा सारे ... ऐ आब-ए-रौंद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको उतरा तेरे किनारे, जब कारवां हमारा, सारे .. . मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा, सारे ... यूनान, मिस्र, रोमां, सब मिट गए जहाँ से अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा, सारे ... कुछ बात है की हस्ती, मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा, सारे .. . 'इक़बाल' कोई मरहूम, अपना नहीं जहाँ में मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा, सारे गीतकार इकबाल संकलक वैशाली सावंत कल्याण ठाणे 9. हिंद देश के निवासी हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली बेला गुलाब जूही चम्पा चमेली प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं प्यारे-प्यारे फूल गूंथे माला में एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी कोयल की कूक न्यारी पपीहे की टेर प्यारी गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है गा रही तराना बुलबुल राग मगर एक है हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कृष्णा कावेरी जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं जाके मिल गयी सागर में हुई सब एक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप वेष भाषा चाहे अनेक हैं हिन्द देश के निवासी.. संकलक- हेमलता बाळासाहेब राजगुरू शाळा- अमरवाडी तालुका- जुन्नर जिल्हा- पुणे 10. ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन हैं हम सब का, लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने हैं प्राण गवाये कुछ याद उन्हें भी कर लो, कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये, जो लौट के घर ना आये ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय, ख़तरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लडे वो, फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा, सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मद्रासी सरहद पर मरनेवाला, हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वतपर, वो खून था हिन्दुस्तानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदुक उठाके दस दस को एक ने मारा, फिर गिर गये होश गँवा के जब अंत समय आया तो, कह गये के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिए कही ये कहानी जो शहीद हुये हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी जय हिंद, जय हिंद की सेना जय हिंद, जय हिंद की सेना jayshree netaji dhumal osmanabad 11. नया दौर यह देश है वीर जवानोका अलबेलो का,मस्तानो का इस देश का यारो क्या कहना यह देश है दुनिया का गाहना.......... यहा चौडी छाती वीरों की यहा भोली शकलें हीरो की यहां गाते है रांझे मस्ती मे मचती है धूमे बस्ती मे.......... पेडों पे बहारे झूलो की राहों मे कतारे फूलों की यहा हसता है सावन बालो में खिलती है कलियां गालो मे........... कही दंगल शोख जवानो के कही करतब तीर कमानो के यहां नित-नित मेले सजते है नित ढोल और ताशे बजते है...... दिलवर के लिए दिलदार है हम दुश्मन के लिए तलवार है हम मैदा मे अगर हम डाट जाआ मुश्किल है की पिछे हट जाएं........... संकलकi मीनाक्षी काटकर यवतमाळ 12. भूलकर हम भेद सारे देश बंधू एक होगे|| एकता के गीत गाकर राष्ट्र की रक्षा करेंगे| राष्ट्र पर संकटे गिरा तो सामना उसका करेंगे| याद कर इतिहास साक्षी सत्य के खातिर मरेंगे | हिंदाभू के पुत्र है हम ना किसी से हम डरेंगे | भूलकर हम भेद सारे ||1|| शांती का संदेश देता विश्व मे भारत हमारा | शूर वीरोंकी भूमीहै प्रेरणा जय हिंद हमारा | पूजा संतोकी धरा है है कर्म करते ही रहेंगे | भूलकर हम भेद सारेदेशबंधू एक होंगे ||2|| संकलन शुभांगी राहणे प.जि.बुलडाणा. स.खामगाव 13.हिंद देश की विशेषता अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता देश की विशेषता , राष्ट्र की विशेषता एक राह में है मित मित एक प्यारके एक बाग के हैं फुल फुल एक हारके देखती है यह जमीन आसमान देखता __ १ एक देश के अंग रंग भिन्न भिन्न है ‌‌ एक जननी भारती के कोटी सूत अभिन्न है कोटी जीव बालकोके ब्रह्म एक खेलता __ २ कर्म है बटे हुये पर एक भूल मर्म है राष्ट्रभक्ती ही हमारा एकमात्र धर्म है कंठ कंठ देश का एक स्वर बिखेरता __ ३ संकलन _ योगिता पंकज लोखंडे धरणगाव जि. जळगाव 14. ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये जो लौट के घर ना आये ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिए सुनो ये कहानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जब घायल हुआ हिमालय खतरे में पड़ी आज़ादी जब तक थी साँस लड़े वो जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने थी धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी कोई सिख कोई जाट मराठा कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी कोई गुरखा कोई मदरासी सरहद पर मरनेवाला सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बन्दूक उठाके दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गये होश गँवा के जब अन्त-समय आया तो जब अन्त-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं अब हम तो सफ़र करते हैं क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी तुम भूल न जाओ उनको इस लिये कही ये कहानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुरबानी जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की सेना जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द की सेना जय हिन्द जय हिन्द जय हिन्द *संकलन* नूतन चौधरी मालेगाव, नाशिक 15.नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ बोलो मेरे संग, जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद ... रस्ते पे चलूंगा न डर-डर के चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के मंज़िल से पहले ना लूंगा कहीं दम आगे ही आगे बढ़ाउंगा कदम दाहिने बाएं दाहिने बाएं, थम! नन्हा ... धूप में पसीना बहाउंगा जहाँ हरे-भरे खेत लहराएंगे वहाँ धरती पे फ़ाके न पाएंगे जनम आगे ही आगे ... नया है ज़माना मेरी नई है डगर देश को बनाउंगा मशीनों का नगर भारत किसी से न रहेगा कम आगे ही आगे ... बड़ा हो के देश का सितारा बनूंगा दुनिया की आँखों का तारा बनूंगा रखूँगा ऊंचा तिरंगा हरदम आगे ही आगे ... शांति कि नगरी है मेरा ये वतन सबको सिखाऊंगा प्यार का चलन दुनिया में गिरने न दूंगा कहीं बम आगे ही आगे ... संकलक: *ज्योती परदेशी* *जि प शाळा देऊर खुर्द* *ता जि धुळे* 16.तेरी मिट्टी में... तलवारों पे सर वार दिये अंगारों में जिस्म जलाया है तब जा के कहीं हमने सर पे ये केसरी रंग सजाया है ऐ मेरी ज़मीं, अफ़सोस नही जो तेरे लिये सौ दर्द सहे महफ़ूज़ रहे तेरी आन सदा, चाहे जान मेरी ये रहे ना रहे ऐ मेरी ज़मीं, महबूब मेरी मेरी नस-नस में तेरा इश्क़ बहे "फिका ना पड़े कभी रंग तेरा, " जिस्मों से निकल के खून कहे तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरे खेतों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू सरसों से भरे खलिहान मेरे जहाँ झूम के भंगडा पा ना सका आबाद रहे वो गाँव मेरा जहाँ लौट के वापस जा ना सका ओ वतना वे , मेरे वतना वे तेरा-मेरा प्यार निराला था कुर्बान हुआ तेरी अस्मत पे मैं कितना नसीबो वाला था तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरे खेतों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू केसरी ओ हीर मेरी, तू हँसती रहे तेरी आँख घड़ी भर नम ना हो मैं मरता था जिस मुखड़े पे कभी उसका उजाला कम ना हो ओ माई मेरी, क्या फ़िक्र तुझे? क्यूँ आँख से दरिया बहता है? तू कहती थी, तेरा चाँद हूँ मैं और चाँद हमेशा रहता है तेरी मिट्टी में मिल जावा गुल बनके मैं खिल जावा इतनी सी है दिल की आरज़ू तेरी नदियों में बह जावा तेरी फ़सलों में लहरावा इतनी सी है दिल की आरज़ू संकलन : सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी. बु. ता. अर्धापूर. जि. नांदेड 17.अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... सर कटा सकते है लेकिन,सर झुका सकते नही हमने सदियो मे ये. आजादी की नेमत पायी है सैकडो कुर्बानीया देकर ये दौलत पाइ हे मुस्कुराकर खाये सीनो पे अपने गोलिया कितने विरानो से गुजरे है तो जन्नत पाइ है खाक मे अपनी ईज्जत को मिला सकते नही अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... क्या चलेगी जुल्म की.अहले वफा के सामने हा नही सकता कोई शोला हवाके सामने लाख फौजे ले के आए अमन का दुश्मन कोई रुक नही सकता हमारी एकता के सामने हम वो पत्थर है जिसे दुश्मन हिला सकता नही अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही...... वक्त की आवाज के साथ हम चलते जायेंगे प्रतिभा पाटील जळगाव १८. देशभक्ती गीत यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है अरमान तिरंगा है अभिमान तिरंगा है अरमान तिरंगा है अभिमान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है यह आन तिरंगा है यह शान तिरंगा है याद सहीदो की आएगी जब ये ध्वज लहराएंगे जब ये ध्वज लहराएंगे इसके तीनों रंग कयामत सदियों तक लहरायेंगे आजादी जिनके दम से है उनका नाम बढ़ायेंगे उनकी क़ुरबानी को यारो हरगिज़ नहीं लजायेंगे विश्वास तिरंगा है वरदान तिरंगा है विश्वास तिरंगा है वरदान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है इसके खातिर कसम है हमको अपना शीश कटा देंगे अपना शीश कटा देंगे जितना भी इस जिस्म में बाकी सारा लहू बहा देंगे सारा लहू बहा देंगे इसके खातिर जो हम थानेगे करके हम दिखला देंगे अपनी धरती के आगे हम सारा गगन झुका देंगे सारा गगन झुका देंगे ईमान तिरंगा है भगवान् तिरंगा है ईमान तिरंगा है भगवान् तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है मेरी जान तिरंगा है. संकलक: *ज्योती परदेशी* जि प शाळा देऊर खुर्द ता जि धुळे १९.मेरा मुल्क..... मेरा मुल्क, मेरा देश, मेरा ये वतन शांति का, उन्नति का , प्यार का चमन इसके वास्ते निसार है , मेरा तन ss मेरा मन ए वतन ... 3 जानेमन...3 मेरा मुल्क...........का चमन इसकी मिट्टी से बने, तेरे मेरे ये बदन इसकी धरती, तेरे मेरे , वासते गगन इसने ही सिखाया हमको, जिने का चलन....3 इसके वासते निसार है मेरा तन, मेरा मन ए वतन .... 3 जाने मन...... 3 संकलन : सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी. बु. ता. अर्धापूर. जि. नांदेड. २०. सवारते चलो वतन सवारते चलो वतन दुलारते चलो वतन मुसीबते हजार है, रुके नही बडे चरण निखर रहा शवाब है यह वक्त लाजवाब है जिधर बडे कदम उधर जानो इन्कलाब है इन्कलाब जिंदाबाद (२) समाज के सडे गले विचार को करो दफन यह देश तो हसीन है विहस रही जमीन है मगर यहाँ का आदमी अभी नही जहीन है बिखरे दो विकास कि जमक धमक भरी किरण संकलन - श्रीम.इंगळे सुनिता भाऊसाहेब कोपरगाव जि.अ.नगर . २१. कँधो से मिलते है कंधे....... कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोह दिल दुश्मन के हिलते हैं कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं| अब तो हमें आगे बढ़ते है रेहना अब तो हमें साथी है बस इतना ही कहना अब तो हमें आगे बढ़ते हैं रहना अब तो हमें साथी है बस इतना ही कहना अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं| निकले हैं मैदान में हम जान हथेली पर ले कर अब देखो दम लेंगे हम जाके अपनी मंज़िल पर खतरों से हस्के खेलना इतनी तो हम में हिम्मत है मोड़े कलाई मौत की इतनी तो हम में ताक़त है हम सरहदों के वास्ते लोहे की एक दीवार है हम दुश्मनों के वास्ते होशियार है तैयार है अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं| जोश दिल में जगाते चलो जीत के गीत गाते चलो जीत की जो तस्वीर बनाने हम निकले हैं अपनी लहू से हम को उस में रंग भरना है साथी मैंने अपने दिल में अब ये ठान लिया है या तो अब करना है या तो अब मरना है चाहें अंगारें बरसे के बिजली गिरे तू अकेला नहीं होगा यारा मेरे कोई मुश्किल हो या हो कोई मोर्चा साथ हर मोड़ पर होंगे साथी तेरे अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके परबत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोदिल दुश्मन के हिलते हैं | इक चेहरा अक्सर मुझे याद आता है इस दिल को चुपके चुपके वो तड़पाता है जब घरसे कोई भी खत आया है कागज़ को मैंने भीगा भीगा पाया है हो, पलकों पे यादों के कुछ दीप जैसे जलते हैं कुछ सपने ऐसे हैं जो साथ साथ चलते हैं कोई सपना न टूटे कोई वादा न टूटे तुम चाहो जिससे दिल से वो तुमसे ना रूठे अब जो भी हो शोला बनके पत्थर है पिघलाना अब जो भी हो बादल बनके पर्बत पर है छाना कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तोह दिल दुश्मन के हिलते हैं| चलता है जो ये कारवाँ गुंजी सी है ये वादियां है ये ज़मीन (गुंजी गुंजी) ये आसमान (गूंजा गूंजा) है ये हवा (गुंजी गुंजी) है ये समां (गूंजा गूंजा) हर रस्ते ने हर वादी ने हर पर्बत ने सदा दी हम जीतेंगे हम जीतेंगे हम जीतेंगे हर बाज़ी कन्धों से मिलते हैं कंधे कदमों से कदम मिलते हैं हम चलते हैं जब ऐसे तो दिल दुश्मन के हिलते हैं | संकलन :सौ. वागरे जयश्री चंद्रकांत जि. प. हा. लोणी बु. ता. अर्धापूर जि. नांदेड २२. २३.हिंद के बहादुरो... हिंद के बहादुरो, वक्त की पुकार है बढना है बढना है, आगे सबसे बढना है......ध्रु दिलो मे जलती आग है, हथेलीयोमें जान है हौसले बुलंद है, गगन छुने वाले है आंधिया चले या बिजलिया गिरे हनुमानकी छलांग लेके, तीर बनके चलना है.......१ भूल जावो प्रांत भाषा, रंग भेदभाव को एकता के नामसे, सजावो हिंद भूमीको तुटेंगे नही, फुटेंगे नही कारवां हमारा यह कदम, कदम बढाना है......२ हम है दूत शांतीके, विश्व को बताना है जंगखोर हम नही, अतीत भी गवाह है यह बुद्ध की धरा, यह गांधी की की धरा नीती, धर्म-कर्म योग आज हमें लाना है हिंद के बहादूरो........३ लाला.......ला...... संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला २४.आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||धृ|| उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है बाट-बाट में हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती हैं बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||1|| ये हैं अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे बोल रही है कण कण से क़ुर्बानी राजस्थान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||2|| देखो मुल्क मराठों का यह यहां शिवाजी डोला था मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था हर पर्वत पे आग जली थी हर पत्थर एक शोला था बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था शेर शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||3|| जलियाँवाला बाग ये देखो यहीं चली थी गोलियां ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियां एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियां मरनेवाले बोल रहे थे इंक़लाब की बोलियां यहां लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम ||4|| ये देखो बंगाल यहां का हर चप्पा हरियाला है यहां का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम||5|| संकलक--अंजु जोशी बीड २५.चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु || हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 || जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 || जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3 || संकलक---अंजु जोशी बीड २६.एकता, स्वतंत्रता,समानता रहे देश मे चरित्र कि महानता रहे ||धृ|| कंठ है करोडो गीत एक राष्ट्र का, रंग है अनेक चित्र एक राष्ट्र का, रूप है अनेक भाव एक राष्ट्र का, शब्द है अनेक अर्थ एक राष्ट्र का, चेतना,समग्रता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||१|| विकास मे विवेक स्वप्न एक राष्ट्र का, योजना अनेक ध्यान एक राष्ट्र का, कर्म है अनेक लक्ष्य एक राष्ट्र का, पंथ है अनेक धर्म,एक राष्ट्र का, सादगी,सहिष्णुता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||२|| जाती है अनेक रक्त एक राष्ट्र का, पंक्ती है अनेक लेख एक राष्ट्र का, काम है अनेक अंग एक राष्ट्र का, हिरन है अनेक सूर्य एक राष्ट्र का, जागरण,मनुष्यता,समानता रहे, देश मे चरित्र कि महानता रहे||३|| संकलन:- मिनाक्षी प्रल्हादराव भटकर जि.प.उच्च प्राथमिक शाळा पानवाडी तालुका -आर्वी जिल्हा-वर्धा २७. अनेकता मे एकता अनेकता मे एकता हिंद की विशेषता एक राग के हे गीत ,गीत एक प्यार के!!धृ!! एक बाग के है फुल, फुल एक हार के देखती है यह जमीन आसमान देखता!!१ एक देश के हे अंग रंग भिन्नभिन्न आहै एक जनी भारती के नोटीस उत्तर अभिन्न आहे कोटी जीव बालको मे ब्रह्म एक खेलता!!२!! कर्म हे बडे हुए पर एक मूल मर्म है राष्ट्रभक्ती ही हमारा एक मात्र धर्म आहे कोटी कंठ कंठ का एक स्वर बीखेरता!!३!! एक लक्ष्य एक प्राण, प्रण से हम जुटे हुए एक भारती की अर्चना मे हम लगे हुए कोटी कोटी साधकों का एक राष्ट्र देवता!!४!! संकलन सौ.प्रतिभा पगारे २८.ध्वज उंच तिरंगा डोले रे ध्वज उंच तिरंगा डोले रे, ध्वज डोले रे (२) तो रवी चंद्राशी बोले रे!!धृ!! कोणी लढता लढता पडले रे (२) कोणी फासावरती चढले रे (२) यश त्यांचे गगना भिडले, गगना भिडले (२) का डोळे करिता ओले रे !!१!! जन हृदया बंधन कसले रे(२) चैतन्य असे रस-रसले(२) हे श्रेय अलौकिक असले ,अलौकिक असले(२) लाभले शिवाच्या मोले रे!!२!! स्वातंत्र्य बंधुता ,समता शांतता, अहिंसा, ममता ह्यांच्या स्तव हिंदी जनता, हिंदी जनता(२) ध्वज भुजदंडावर डोले रे!!३!! संकलन सौ.प्रतिभा पगारे २९ उठो हिंद के वीर सपूतो उठो हिंद के वीर सपूतो माँ ने तुम्हें पुकारा है खलिस्तान क्यों मांग रहे हो, हिंदुस्थान तुम्हारा है काश्मीर क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है बोरोलँड क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है आवाज दो हम एक है!!धृ!! हिंदू, मुस्लिम, सिख ,ईसाई, सब है भाई भाई प्रेम पाश में बंधे रहे तो, होगी नही लडाई एकही मंदिर मस्जिद गिरीजा, अलग नही गुरुद्वारा !!१!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है हम पंजाबी, हम बंगाली, गुजराती, मद्रासी लेकिन सबसे पहले हम है, केवल भारत वासी यही हमारा मूलमंत्र है, यही हमारा नारा!!२!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्थान तुम्हारा है सोना- चांँदी जो कुछ मांगो, हम देते है हिरा-मोती जो कुछ मांगो, हम देते है खून का कतरा कतरा मांगो, हम देते है महेल ठिकाणा जो कुछ मांगो, हम देते है तनका टुकडा टुकडा मांगो, हम देते है करो फैसला आज तुम्हे क्या, माँ का है बटवारा!!३!! खलिस्तान क्यों मांग रहे हो हिंदुस्तान तुम्हारा है संकलन सौ.प्रतिभा पगारे 30.प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा चाल - कांची रे कांची रे प्रीत मेरी सांची प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा चमके हा धृवाचा तारा बंधूंनो चमके हा ध्रुवाचा तारा!!धृ!! ऋषीमुनी ,वाणी जन्मते इथे गंगा ,गोदा ,कृष्णा वाहते इथे अति पवित्र पावन ही भूमी वाहती नद्यांच्या धारा!!१!! प्यारा रे प्यारारे देश मेरा प्यारा आर्य,द्रविड,रजपूत संस्कृती भारी ब्रिटिश युग संपता,वाजे तुतारी इंग्रज ही गेले फ्रेंच ही गेले वर्षवी ममता तुषारा!!२!! प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा स्वातंत्र्याचा झेंडा मिरविला जगी स्वातंत्र्याचे बाहुबल आहे अंगी ना साथ डुलक्या पडक्या घराची लावू भवानी अंगारा हो!!३!! प्यारा रे प्यारा रे देश मेरा प्यारा संकलन सौ.प्रतिभा पगारे ए मेरे वतन के लोगो ए मेरे वतन के लोगो तुम खूब लगा लो नारा ये शुभ दिन है हम सब का लहरा दो तिरंगा प्यारा पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आये ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी तुम भूल ना जाओ उनको इसलिये सुनो ये कहानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जब घायल हुआ हिमालय खतरे मे पडी आजादी जब तक थी साँस लढे वो फिर अपनी लाश बिछा दी संगीन पे धर कर माथा सो गये अमर बलिदानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जब देश मे थी दिवाली वो खेल रहे थे होली जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली थे धन्य जवान वो अपने की धन्य वो उनकी जवानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बंदूक उठाके दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के जब अंत-समय आया तो कह गये के अब मरते है खुश रहना देश के प्यारो अब हम तो सफर करते है क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी तुम भूल न जाओ उनको इसलिये कही ये कहानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी ए मेरे वतन के लोगो जरा आखो मे भरलो पानी जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी जय हिंद जय हिंद जय हिंद की सेना जय हिंद जय हिंद जय हिंद की सेना जय हिंद जय हिंद जय हिंद संकलक सौ.श्वेता राजेंद्र घरत ३१. गलत मत कदम उठाओ... गलत मत कदम उठाओ सोचकर चलो, विचार कर चलो राह की मुसीबतोंसे प्यार कर चलो.....ध्रु प्रणाम कर तिरंगे को, है हिंद का निशान मर मिटेंगे हम सभी, रखेंगे इसकी शान भाईयों चलो, बहनो तुम चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......१ वक्त की आवाज है, ये भुलना नही स्वतंत्रता की रक्षा करने, हटना नही शीष ले चलो, जान ले चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ........२ वीर शिवाजी, राणा के, भूमी में हम पले आझाद हिंद सेनाको, हम नही भूले नेफापे चलो, लद्दाख को चलो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......३ हिन्दु, बौद्ध, सिख, जैन, ख्रिस्ती पारसी एकता के ताजसे, सजी है भारती शिश झुकालो, तिलक लगालो इन्सानियत के दुश्मनोंपे वार कर चलो गलत मत कदम उठाओ.......४ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३२. ए वतन... ए वतन, ए वतन, जॉसे प्यारे वतन कर दु तुझेपे फिदा, अपना तन और मन.....ध्रु ए महकती हुयी, ठंडी ठंडी हवा झूम झूम उठे दिल, ऐसी रंगी फिजा तू तो है प्यार का मुस्कुराता चमन ए वतन, ए वतन.......१ तुझमें गांधी भी है, तुझमे नेहरू भी है तुझमें टिपू भी है, तुझमें आझाद भी तुने पैदा किये कैसे कैसे रतन ए वतन, ए वतन........२ गंगा जमुना तेरी, जैसी दो बेटीया जिनके दमसे हरी, होती है खेतीया सोना उगले जमी, लहराये चमन ए वतन, ए वतन.........३ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३३. ये मेरा वतन है... महका हुवा फुलोंसे, सदा मेरा चमन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है.......ध्रु बिखरे हुए हर मोडपे, दिलकश है नजारे भारतमें मेरे लोग तो, अनमोल है सारे मस्जिद भी है मंदिर भी, यहा गंगा चमन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है........१ रहते है यहा मिलकर, हर धरम के इन्सान सीनोमें धडकते है, यहा प्यार के अरमां सोने की धरती तो, सितारों का गगन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है........२ नफरत ना शिकायत ना, अदावत हो दिलोंमें बस प्यार हो अहसास, मोहब्बत हो दिलोंमें ये ऑख का तारा तो, अनमोल रतन है ये मेरा वतन, मेरा वतन, मेरा वतन है.........३ संकलक - मनिषा मधुसूदन शेजोळे ता.जि.- अकोला ३४.भारत हमको जान से प्यारा है| भरत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ता हमारा है सदियों से भारत भूमी दुनिया की शान है भारतमाँकी रक्षा मे जीवन कुर्बान है| उजडे नही अपना चमन तुटे नही अपना वतन बुरीे राहना करदेे कोई मंदिर यहाँ मज्जीद यहां हिंदू यहा मुस्लीम यहा मिलते रहै हमसे प्यार हम प्यारसे हिन्दुस्तानी नाम हमारा सबसे प्यारा देश हमारा है जन्मभूमी है हमारी शान से कहेगे हम सभी को भाई भाई प्यार से कहेंगेहम आसामसे गुजरातक बंगाल से महाराष्ट्र तक जागी कही धून एक है भाषा कईसुर एक है काश्मीर से मद्रास तक कह दो सभी हम एक है| पि.के. मिश्रा संकलन -श्रीम.आशा भामरे जिल्हा परिषद शाळा शिलापूर नाशिक ३५.भारत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है भारत हमको जान से प्यारा है सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है सदियों से भारत भूमी दुनियाँ की शान है भारत माँ की रक्षा में जीवन कुर्बान है भारत हमको जान से प्यारा हैं सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा हैं उजड़े नहीं अपना चमन टूटे नहीं अपना वतन गुमराह ना कर दे कोई बर्बाद ना कर दे कोई मंदिर यहाँ, मस्जिद यहाँ हिंदू यहाँ, मुस्लिम यहाँ मिलते रहे हम प्यार से जागो…… हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है जन्मभूमी हैं हमारी शान से कहेंगे हम सब ही तो भाई भाई प्यार से रहेंगे हम हिन्दुस्तानी नाम हमारा है सबसे प्यारा देश हमारा है आसाम से गुजरात तक बंगाल से महाराष्ट्र तक जाती कई -धुन एक हैं, भाषा कई -सूर एक है कश्मीर से मद्रास तक कह दो सभी हम एक है आवाज़ दो हम एक है जागो….. संकलन श्रीमती नूतन चौधरी जि.प.शाळा टेहेरे मालेगाव,नाशिक ३६. ये मेरा वतन है... मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं सुनके रहट की आवाज़ें यूं लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है क्यूं ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिसने जनम लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा यहां अपना पराया कोई नहीं है सब पे है मां उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहां गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, ऐसे हैं अमन के फूल यहां रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती… संकलन श्रीमती नूतन चौधरी मालेगाव,नाशिक ३७.नौ जवानो. नौ जवानो भारत की तकदीर बना दो फुलों को इस गुलशन से काटो को हटा दो ||धृ|| छोड के सारे भेदभाव को समझो देश हो अपना -२ रहना जाये देख अधुरा कोई सुंदर सपना-२ घर मे आग लगाये जो ,उस दीप को बुझा दो ||१|| हम भारत के वाशी क्यू हो दुनिया मे शरर्मिंदा-२ देश के कारण मौत भी है फिर भी रहेंगे जिंदा-२ जय जय हिंद के नारो से धरती को हिला दो ||२|| अपने साथ है कैसी कैसी बलवानों की शक्ती-२ वीर जवाहरलाल की हिंमत बापुजी की भक्ति-२ देश का झेंडा उॅंचा करके दिखा दो ||३|| संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ३८. वंदे मातरम् वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, भारत वंदे मातरम, जय भारत वंदे मातरम,रुकना पाहे तुफानो मे सबसे आगे बडे कदम जीवनपुष्प चढाने निकले माता के चरणों में हम ||धृ|| मस्तपर हिमराज विरहित, उन्नत माथा माता का चरणधोर हा विशाल सागर देश ही सुंदरता का हरियाली साडी पहनी मॉऽऽऽ हरियाली साडी पहनी मॉ गीत तुमहारे गाये हम ||१|| नदियन की पावन धारा है,मंगळ मला गंगा की कमरबंद है विद्याद्रिकी, सातपुडा की सेनीकी सह्याद्री का वज्रहस्त है ।ऽऽऽसह्याद्री का वज्रहस्त है । पौरुष को पहचाने हम ||२|| नही किसीके सामने अपने, अपना शीष झुकाया है। जो हमसे टकरायेगा,काल उसी का आया है। तेरा वैभव वैभव सदा रहे माॅ ऽऽऽतेरा वैभव वैभव सदा रहे माॅ विजय दर्ज पहराये हम ||३|| वंदे मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम्................. संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ३९.मनुष्य तू बडा महान है। धरती की शान तू है। मनु की संतान तेरे मुठ्ठीओमे बंद तुफान है रे । मनुष्य तू बडा महान है भूलो मत।मनुष्य तू बडा महान है।। तुजो चाहे पर्वत पहाड को फोड दे। तुजो चाहे नदी ओके मुख को भी मोड़ दे। तुजो चाहे माटी से अमृत भी छोड़ दे। तुजो चाहे धरती को अंबर से जोड दे। अमर तेरा प्राण ऽऽऽ-२मिला तुझको वरदान तेरी -आत्मा ओमे स्वंयभगवान है रे ||१|| नयनो ज्वाला तेरी गती में भू चाल है। तेरी छाती मे छुपा महाकाल है। पृथ्वी के लाल तेरी हिमगिरसा भाल । तेरी भुकू रोते तांडव का ताल है। निजको तु जान ऽऽऽ-२ जरा शक्ती पहचान रे तेरी बाहोमें थुम का आव्हान है रे ||२|| धरती सा धीर तुहे,अग्नीसा वीर तुहे। तुजो चाहे काल कोभी थाब ले। पपायो प्रलय रुके, पशुताका शिश झुके तुजो अगर हिंमत से काम ले। गुरूसा गतिमान ऽऽऽ-२ पवनसा तु साम गतिमान तेरी नभसे भी ऊंची उड्डान है रे ||३|| संकलन- सौ.हर्षला हरेश पाटील. ता.वाडा,जि.पालघर. ४०.सबसे ऊॅंची विजय पताका सबसे उॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा मानवता का मानबिंदू यह भारत सबसे बड़ा रहेगा ।।धृ।। विंध्या की चट्टानों पर रेवा की यह गति तूफानी शत-शत वर्षा तक गाएगी जीवन की संघर्ष कहानी । इसके चरणों में नत होकर हिंदू महादधि पड़ा रहेगा सबसे उॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा।।1।। जिसकी मिट्टी में पारस है स्वर्ण -धूली उस बंगभूमि की पंचनदी के फव्वारों से सिंची बहारे पुण्य भूमि की। शीर्ष -बिंदु श्रीनगर सिंधु तक सेतुबंध भी अड़ा रहेगा सबसे ऊॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा ।।2।। जिस धरती पर चंदा सूरज साॅंझ सवेरे नमन चढ़ाते षड्-ऋतु के सरगम पर पंछी दीपक और मल्हार सुनाते । वही देश मणि माॅं वसुधा के हृदय हार में जड़ा रहेगा सबसे ऊॅंची विजय पताका लिए हिमालय खड़ा रहेगा ।।3।। संकलन -मनिषा खामकर पुणे ४१.विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा झण्डा ऊँचा रहे हमारा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा ।।धृ।। सदा शक्ति बरसानेवाला प्रेम सुधा सरसानेवाला वीरों को हर्षानेवाला मातृभूमि का तन-मन सारा झण्डा ऊँचा ...।।१।। स्वतंत्रता के भीषण रण में लखकर कर जोश बढ़े क्षण-क्षण में काँपे शत्रु देख कर मन में मिट जावे भय संकट सारा झण्डा ऊँचा ...।।२।। इस झण्डे के नीचे निर्भय हो स्वराज जनता का निश्चय बोलो भारत माता की जय स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा झण्डा ऊँचा ...।।३।। शान न इस की जाने पावे चाहे जान भले ही जावे विश्व विजय कर के दिखलावे तब होवे प्रण पूर्ण हमारा झण्डा ऊँचा ...।।४।। रेखा शिंदे औरंगाबाद जि.प.प्रा.शाळा पाथ्री ४२.दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल आँधी में भी जलती रही गाँधी तेरी मशाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ...।।१।। धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई वाह रे फ़कीर खूब करामात दिखाई चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ..... रघुपति राघव राजा राम।।२।। शतरंज बिछा कर यहाँ बैठा था ज़माना लगता था मुश्किल है फ़िरंगी को हराना टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था ताना पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना मारा वो कस के दांव के उलटी सभी की चाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ..... रघुपति राघव राजा राम।।३।। जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े मज़दूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े हिंदू और मुसलमान, सिख पठान चल पड़े कदमों में तेरी कोटि कोटि प्राण चल पड़े फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी .... रघुपति राघव राजा राम।।४।। रघुपति राघव राजा राम मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोटी वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी दुनिया में भी बापू तू था इन्सान बेमिसाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी ... रघुपति राघव राजा राम ।।५।। जग में जिया है कोई तो बापू तू ही जिया तूने वतन की राह में सब कुछ लुटा दिया माँगा न कोई तख्त न कोई ताज भी लिया अमृत दिया तो ठीक मगर खुद ज़हर पिया जिस दिन तेरी चिता जली, रोया था महाकाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल रघुपति राघव राजा राम।।६।। रेखा शिंदे औरंगाबाद जि.प.प्रा.शाळा पाथ्री समूह गीत हिंदी 1.इन्साफ की डगर पे बच्चे दिखाओ चलके यह देश है तुम्हारा नेता तुम्ही हो कल के दुनिया के रंज सहना और कुछ ना मुहसे कहना सच्चाई के बल पे आगे बढते रहना रख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल के इन्साफ की डगर पे //1// अपने हो या पराये सबके लिये हो न्याय देखो कदम तुम्हारा हरगीज डगमग आये रस्ते बडे कठीण आहे चलना संभल संभालके इंसाफ की डगर पे //2// इन्सानियत के सर पे इज्जत का ताज रखना तनमन की भेट देकर भारत की लाज रखना जीवन नया मिलेगा अंतिम चिता जलके इंसाफ की डगर पे//3// संकलन सौ.अलका अनिल बामणे कन्या विद्या मंदिर उत्तूर ता.आजरा जि.कोल्हापूर समूह गीत. शिर्षक - दिल मेरा जान मेरी मेरा वतन.. 2. समूहगीत एक जगत की धरती माता, सब उसकी संतान ||धृ || भेदभावसे हम मुख मोडे | दुष्कर्मो का मार्ग छोडे | सब राष्ट्रो से नाता जोडे, बने गुणों की खान ||1|| सत्य, अहिंसा, प्रेम बढाये | देशभक्ती का दिप जलाए | जनसेवा को धर्म बनाए, रहे इसिमें ध्यान ||2|| दुर्जन को भी कर दे सज्जन | मानवतामय हो यह जीवन | सदा निती पर वाहे तनमन, बढे हमारी शान ||3|| संकलन : सौ. वागरे. जे. सी. जि. प. हा. लोणी ता. अर्धापूर जि. नांदेड

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